दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध संपर्क बढ़ाने में उपग्रह संचार की भूमिका अहमः ट्राई प्रमुख

दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध संपर्क बढ़ाने में उपग्रह संचार की भूमिका अहमः ट्राई प्रमुख

दूरदराज क्षेत्रों में निर्बाध संपर्क बढ़ाने में उपग्रह संचार की भूमिका अहमः ट्राई प्रमुख
Modified Date: July 22, 2026 / 09:01 pm IST
Published Date: July 22, 2026 9:01 pm IST

नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने बुधवार को कहा कि उपग्रह संचार (सैटकॉम) देश के दूरदराज और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में निर्बाध संपर्क के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

लाहोटी ने कहा कि उपग्रह आधारित संचार प्रणाली न केवल डिजिटल विभाजन को कम करने में मदद करेगी, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं एवं आपात स्थितियों के दौरान मजबूत संचार ढांचा उपलब्ध कराएगी। इससे पारंपरिक दूरसंचार नेटवर्क प्रभावित होने की स्थिति में भी जरूरी सेवाओं की निरंतरता बनी रहेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘उपग्रह संचार देशभर में निर्बाध और सर्वव्यापी संपर्क (कनेक्टिवटी) उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है, खासकर दूरदराज, ग्रामीण और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में।’’

उन्होंने आईएएफआई के ‘अंतरिक्ष नीति सम्मेलन 2026’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मौजूदा आकार करीब 8.4 अरब डॉलर है, जिसके 2030 तक बढ़कर 45 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। वर्ष 2040 तक इसमें कई गुना वृद्धि की संभावना है।

लाहोटी ने कहा कि भारत अंतरिक्ष आधारित डिजिटल बदलाव के एक नए दौर के मुहाने पर खड़ा है। उपग्रह नेटवर्क आपदा प्रबंधन, समुद्री और विमानन संचार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के साथ तेजी से बढ़ रहे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) पारिस्थितिकी के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे सामने मौजूद अवसर व्यापक और बदलावकारी हैं। भारत वैश्विक डिजिटल परिदृश्य को आकार दे रहा है। आगे बढ़ने के लिए निरंतर सहयोग, लचीली नीतिगत व्यवस्था और जिम्मेदारी के साथ नवाचार की जरूरत है।”

ट्राई प्रमुख ने कहा कि नियामक के रूप में प्राधिकरण मजबूत दूरसंचार ढांचे को बढ़ावा देने और प्रभावी नीतियों के माध्यम से नवाचार तथा समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सरकार के सुधारों से देश का अंतरिक्ष क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2014 में जहां अंतरिक्ष क्षेत्र में केवल एक स्टार्टअप था, वहीं 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 400 से अधिक हो गई है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में