एसबीआई का अपनी म्यूचुअल फंड इकाई में और हिस्सेदारी कम करने का विचार नहीं : शेट्टी

एसबीआई का अपनी म्यूचुअल फंड इकाई में और हिस्सेदारी कम करने का विचार नहीं : शेट्टी

एसबीआई का अपनी म्यूचुअल फंड इकाई में और हिस्सेदारी कम करने का विचार नहीं : शेट्टी
Modified Date: July 21, 2026 / 04:55 pm IST
Published Date: July 21, 2026 4:55 pm IST

मुंबई, 21 जुलाई (भाषा) भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने मंगलवार को कहा कि बैंक संपत्ति प्रबंधन कंपनी एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में अपनी हिस्सेदारी और कम करने पर विचार नहीं कर रहा है।

देश की सबसे बड़ी संपत्ति प्रबंधन कंपनी एसबीआई एमएफ की सूचीबद्धता कार्यक्रम में शेट्टी ने कहा, ‘‘अभी हम और हिस्सेदारी कम करने पर विचार नहीं कर रहे हैं।’’

उन्होंने इसके साथ यह भी कहा कि आगे हिस्सेदारी बेचने का फैसला पूंजी बाजार नियामक सेबी के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता नियमों के आधार पर होगा।

एसबीआई ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के तहत संपत्ति प्रबंधन कंपनी में अपनी लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। अब उसके पास 55 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है।

इसकी संयुक्त उद्यम भागीदार वैश्विक संपत्ति प्रबंधक अमुंडी ने अपनी लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है और अब उसके पास 32.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दोनों प्रवर्तकों के पास कुल मिलाकर लगभग 88 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सेबी के नियम के अनुसार, इसे धीरे-धीरे घटाकर 75 प्रतिशत करना होगा।

कंपनी का 9,812 करोड़ रुपये का आईपीओ हाल के समय में बाजार में आए सबसे बड़े निर्गम में से एक है। यह निर्गम पूरी तरह से मौजूदा शेयरधारकों की तरफ से बिक्री पेशकश (ओएफएस) था और इसमें कोई नया शेयर जारी नहीं किया गया था।

शेट्टी ने कहा कि लगभग दो दशक में खड़ा किया गया यह कारोबार बहुत अधिक पूंजी पर निर्भर नहीं है। सार्वजनिक सूचीबद्धता का मकसद प्रणाली के हिसाब से बेहतर स्थिति में आना भी था, जहां सबसे बड़े ‘फंड हाउस’ सूचीबद्ध होते हैं।

पिछले कुछ साल में, देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने संपत्ति प्रबंधन कंपनी में लगभग 6,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसका मूल्य अब चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

आगे की भागीदारी के बारे में अमुंडी की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर फ्रांस की कंपनी के उप-मुख्य कार्यपालक अधिकारी निकोलस कैल्कोएन ने एसबीआई के साथ अब तक की यात्रा पर खुशी जताई और कहा कि वे लंबे समय तक बैंक के साथ बने रहेंगे।

भाषा रमण अजय

अजय


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