न्यायालय ने टाटा स्टील को जारी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी मांग नोटिस को रद्द किया

न्यायालय ने टाटा स्टील को जारी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी मांग नोटिस को रद्द किया

न्यायालय ने टाटा स्टील को जारी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी मांग नोटिस को रद्द किया
Modified Date: August 26, 2026 / 05:21 pm IST
Published Date: August 26, 2026 5:21 pm IST

नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने टाटा स्टील के खिलाफ कर अधिकारियों द्वारा जारी 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी मांग एवं कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया है।

यह नोटिस इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) के कथित तौर पर गलत तरीके से इस्तेमाल से संबंधित था।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि टाटा स्टील की ओर से कर चोरी या अतिरिक्त आईटीसी का लाभ उठाने के लिए जानबूझकर कोई प्रयास किए जाने के तथ्य सामने नहीं आए हैं।

न्यायालय ने कहा कि केवल तथ्यों को छिपाने का सामान्य आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है और इससे आयकर विभाग के नोटिस को खतरा पैदा होता है।

पीठ ने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून की धारा 73/74 के तहत कार्यवाही शुरू करने से पहले आकलन अधिकारी की संतुष्टि जरूरी है।

कर अधिकारियों ने टाटा स्टील को वित्त वर्ष 2018-19 से 2022-23 की अवधि के लिए एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की जीएसटी मांग का नोटिस थमाया था।

कंपनी को इस संबंध में अतिरिक्त/संयुक्त आयुक्त, केंद्रीय जीएसटी एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क, जमशेदपुर के समक्ष 30 दिन के भीतर कारण बताने को कहा गया था।

यह नोटिस 27 जून को केंद्रीय कर, रांची के आयुक्त (ऑडिट) कार्यालय ने जारी किया था।

इसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने केंद्रीय माल एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 और संबंधित राज्य तथा एकीकृत जीएसटी कानूनों के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए आईटीसी का लाभ लिया।

टाटा स्टील ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि नोटिस में धोखाधड़ी, जानबूझकर गलत बयान देने या तथ्यों को छिपाने का कोई आरोप स्थापित करने वाले तथ्य नहीं दिए गए हैं।

न्यायालय ने कहा कि ऑडिट के दौरान उठाई गई आपत्तियों या टिप्पणियों के आधार पर नोटिस जारी नहीं किया जा सकता।

नोटिस जारी करने से पहले आकलन अधिकारी को स्वयं इस बात से संतुष्ट होना होगा कि कर में कमी या आईटीसी में गड़बड़ी हुई है और धारा 74 के मामले में धोखाधड़ी या जानबूझकर गलत बयान जैसे तत्व भी मौजूद हैं।

पीठ ने कहा कि विभाग द्वारा ऑडिट की आपत्तियों को लोक लेखा समिति के समक्ष उठाया जाना भी यह दर्शाता है कि आकलन अधिकारी कर में कमी या तथ्यों को छिपाने के आरोप को लेकर पूर्णत: संतुष्ट नहीं था।

भाषा योगेश अजय

अजय


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