मुंबई, 24 सितंबर (भाषा) बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) ढांचे में व्यापक बदलाव को मंजूरी दी है। इसके तहत पोर्टफोलियो प्रबंधकों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और प्राथमिक बाजार में जारी होने वाली ऋण प्रतिभूतियों तथा विदेशी प्रतिभूतियों की व्यापक श्रेणी में निवेश की अनुमति दी गई है।
सेबी के निदेशक मंडल ने यहां हुई बैठक में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (पोर्टफोलियो प्रबंधक) विनियम, 2026 को मंजूरी दी। ये नए नियम मौजूदा 2020 के नियमों की जगह लेंगे। इनका मकसद अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना, अनावश्यक प्रावधानों को हटाना और पीएमएस ग्राहकों के लिए निवेश के अवसरों को बढ़ाना है।
नियामक ने यहां बोर्ड बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि नयी रूपरेखा के तहत पोर्टफोलियो प्रबंधक आईपीओ और प्राथमिक बाजार में जारी ऋण या बॉण्ड प्रतिभूतियों में निवेश कर सकेंगे। वे ग्राहक की सहमति से उसके प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (एयूएम) का 10 प्रतिशत तक निवेश-ग्रेड वाली, गैर-सूचीबद्ध गैर-परिवर्तनीय ऋण प्रतिभूतियों में भी निवेश कर सकेंगे।
वर्तमान में गैर-विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन और सलाहकार सेवाएं ग्राहक के एयूएम का 25 प्रतिशत तक गैर-सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश कर सकती हैं।
सेबी ने कहा कि विवेकाधीन और गैर-विवेकाधीन दोनों तरह की सेवाएं देने वाले पोर्टफोलियो प्रबंधक विदेशी प्रतिभूतियों में भी निवेश कर सकेंगे। इसमें सूचीबद्ध इक्विटी और ऋण प्रतिभूतियां, रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (आरईआईटी), विदेशी म्यूचुअल फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां शामिल हैं। यह निवेश विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) और भारतीय रिजर्व बैंक की उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत होगा।
इसके अलावा, नियामक ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए भारतीय म्यूचुअल फंड योजनाओं के डायरेक्ट प्लान, जिसमें ईटीएफ, इंडेक्स फंड और विशेषीकृत निवेश फंड (एसआईएफ) शामिल हैं, में निवेश का नया रास्ता भी शुरू किया है।
म्यूचुअल फंड इकाइयों में निवेश के लिए पीआरआईएम व्यवस्था के तहत न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपये होगी।
सेबी ने स्वतंत्र कोष प्रबंधकों (आईएफएम) की नई व्यवस्था भी शुरू करने का फैसला किया है। इसके तहत आईएफएम किसी पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक के साथ मिलकर ग्राहकों के पोर्टफोलियो का प्रबंधन कर सकेंगे।
नियामक ने कहा कि आईएफएम की गतिविधियों के लिए पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही पंजीकृत पोर्टफोलियो प्रबंधक की होगी।
सेबी ने एक मानकीकृत निवेश प्रबंधन समझौता (आईएमए) शुरू करने का भी फैसला किया है। इसमें डीमैट और ट्रेडिंग खातों के संचालन का अधिकार भी शामिल होगा। हालांकि, बैंक खातों के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी संबंधी मौजूदा आरबीआई की आवश्यकता जारी रहेगी।
भाषा यासिर अजय
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