सेबी ने जिंस डेरिवेटिव खंड के निपटान गारंटी कोष नियमों में बदलाव किए
सेबी ने जिंस डेरिवेटिव खंड के निपटान गारंटी कोष नियमों में बदलाव किए
नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सोमवार को जिंस डेरिवेटिव खंड के लिए निपटान गारंटी कोष (एसजीएफ) से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिए ताकि समाशोधन निगमों का अनुपालन बोझ घटाया जा सके।
एसजीएफ वह सुरक्षा कोष होता है जिससे किसी सदस्य के चूक करने की स्थिति में बाजार के सौदों का निपटान सुनिश्चित किया जाता है।
संशोधित नियमों के तहत समाशोधन निगमों को एसजीएफ कवरेज की गणना कम-से-कम तीन समाशोधन सदस्यों (और उनके सहयोगियों) के एक साथ चूक की स्थिति में पैदा होने वाले अधिकतम ऋण जोखिम के आधार पर करनी होगी।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अपने परिपत्र में इन नियमों की जानकारी दी। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।
पहले समाशोधन निगमों को एसजीएफ कवरेज की गणना कम-से-कम दो समाशोधन सदस्यों के एक साथ चूक से उपजे अधिकतम जोखिम के आधार पर करनी होती थी। इसके अलावा सभी समाशोधन सदस्यों की चूक से उत्पन्न जोखिम के 50 प्रतिशत हिस्से को भी शामिल करना पड़ता था।
सेबी ने कहा कि वह मामला-दर-मामला आधार पर एसजीएफ से जुड़े कड़े नियमों में छूट या ढील दे सकता है। इसके लिए मौजूदा बाजार परिस्थितियों, जोखिम प्रबंधन व्यवस्था की पर्याप्तता और निवेशकों के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखा जाएगा।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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