सेबी ने महत्वपूर्ण सूचकांकों के लिए नियामकीय ढांचे का प्रस्ताव रखा
सेबी ने महत्वपूर्ण सूचकांकों के लिए नियामकीय ढांचे का प्रस्ताव रखा
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने सूचकांक प्रदाताओं के संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के मकसद से सोमवार को ‘महत्वपूर्ण सूचकांकों’ के लिए एक नियामकीय ढांचे का प्रस्ताव रखा।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के परामर्श पत्र में महत्वपूर्ण सूचकांक को ऐसे सूचकांक के रूप में परिभाषित किया गया है, जिनका प्रबंधन कोई सूचकांक प्रदाता करता है और जो 20,000 करोड़ रुपये से अधिक परिसंपत्ति वाली घरेलू म्यूचुअल फंड योजनाओं द्वारा मानक माने जाते हैं।
बाजार नियामक ने कहा कि प्रबंधन-अधीन परिसंपत्ति (एयूएम) की यह सीमा पिछले छह महीनों के दैनिक औसत एयूएम के आधार पर तय की जाएगी, जो 30 जून और 31 दिसंबर को समाप्त होते हैं।
सेबी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई म्यूचुअल फंड योजना एक से अधिक सूचकांक पर नजर रखती है तो एयूएम को आनुपातिक रूप से बांट दिया जाएगा। वहीं ‘सूचकांकों के सूचकांक’ में अंतर्निहित सूचकांक का एयूएम उनके संबंधित भार के आधार पर शामिल किया जाएगा।
नियामक ने कहा कि यह कदम वित्तीय सूचकांक में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
प्रस्ताव के तहत, चिह्नित महत्वपूर्ण सूचकांक के प्रदाता को सेबी में इंडेक्स प्रदाता के रूप में पंजीकरण के लिए छह महीने के भीतर आवेदन जमा करना होगा।
हालांकि किसी प्रदाता के सभी महत्वपूर्ण सूचकांकों के भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नियंत्रित होने की स्थिति में यह पंजीकरण आवश्यक नहीं होगा।
सेबी ने यह भी कहा कि शिकायत निवारण प्रणाली केवल उन महत्वपूर्ण सूचकांक पर लागू होगी, जो सेबी में पंजीकृत प्रदाताओं द्वारा पेश किए गए हैं।
नियामक ने इस परामर्श पत्र पर 30 जनवरी, 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण


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