वित्त वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,636 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी गिरावट

Ads

वित्त वर्ष के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,636 अंक लुढ़का, निफ्टी में भी गिरावट

  •  
  • Publish Date - March 30, 2026 / 05:50 PM IST,
    Updated On - March 30, 2026 / 05:50 PM IST

मुंबई, 30 मार्च (भाषा) स्थानीय शेयर बाजारों में सोमवार का चालू वित्त वर्ष के अंतिम कारोबारी सत्र में तेज गिरावट आई और बीएसई सेंसेक्स 1,636 अंक लुढ़क गया जबकि एनएसई निफ्टी 488 अंक के नुकसान में रहा। पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहने और कच्चे तेल के दाम में तेजी से निवेशकों की धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

एशियाई बाजारों में कमजोर रुख और विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर पूंजी निकासी ने भी घरेलू शेयर बाजारों में नरमी के रुख को बढ़ाया है।

बाजार में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट रही और तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,635.67 अंक यानी 2.22 प्रतिशत टूटकर 71,947.55 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 1,809.09 अंक तक लुढ़क गया था।

बीएसई में सूचीबद्ध शेयरों में से 3,563 नुकसान में, जबकि 876 लाभ में रहे। वहीं 154 के भाव अपरिवर्तित रहे।

पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 488.20 अंक यानी 2.14 प्रतिशत टूटकर 22,331.40 अंक पर बंद हुआ।

रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध) अजित मिश्रा ने कहा, “पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण बाजार में गिरावट आई। तनाव बढ़ने के साथ संघर्ष थमने की उम्मीद टूटी है और कच्चे तेल की कीमत में तेजी आई है। इससे भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति और वृहद आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई और अमेरिकी बाजारों में गिरावट सहित कमजोर वैश्विक संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर निकासी और रुपये के कमजोर होने से बाजार की धारणा पर और भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।”

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में बजाज फाइनेंस, भारतीय स्टेट बैंक, इंटरग्लोब एविएशन, बजाज फिनसर्व, एक्सिस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक सबसे अधिक नुकसान में रहीं।

दूसरी ओर, टेक महिंद्रा और पावर ग्रिड लाभ में रहें।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.18 प्रतिशत बढ़कर 115.1 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

पिछले दो कारोबारी सत्रों में बीएसई सेंसेक्स 3,325.9 अंक टूटा है जबकि निफ्टी में 975.05 अंक की गिरावट रही।

वित्त वर्ष 2025-26 में, बीएसई सेंसेक्स 5,467.37 अंक यानी सात प्रतिशत लुढ़का, जबकि निफ्टी 1,187.95 अंक यानी पांच प्रतिशत नीचे आया।

बीएसई मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक 3.13 प्रतिशत टूटा जबकि स्मॉलकैप सेलेक्ट में 2.14 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘भारतीय रिजर्व बैंक (आरबी) द्वारा रुपये को स्थिर करने के उद्देश्य से बैंकों की विदेशी मुद्रा स्थितियों पर लगाए गए नए प्रतिबंधों के बाद बैंक शेयरों में भारी गिरावट देखी गई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हाल की गिरावट के बाद शेयरों का मूल्यांकन अधिक अनुकूल हो गया लगता है, लेकिन आय में होने वाले बदलावों का रुख बाजार की दिशा का मुख्य निर्धारक बना हुआ है। तेल की कीमतों में निरंतर अस्थिरता और रुपये में कमजोर रुख से कच्चे माल की लागत पर दबाव पड़ सकता है…।’’

उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया सात पैसे की बढ़त के साथ 94.78 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक समय कारोबार के दौरान यह अबतक के सबसे निचले स्तर 95.22 तक चला गया था।

एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग भी नुकसान में रहे। वहीं चीन का शंघाई एसएसई कम्पोजिट बढ़त में रहा।

यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में मामूली बढ़त थी। अमेरिकी बाजार में शुक्रवार को भारी गिरावट दर्ज की गई।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 4,367.30 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,566.15 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच विदेशी निवेशकों ने मार्च में घरेलू शेयर बाजार से 1.14 लाख करोड़ रुपये (लगभग 12.3 अरब डॉलर) निकाले हैं, जो सबसे बड़ी मासिक निकासी है।

सेंसेक्स शुक्रवार को 1,690.23 अंक टूटा था जबकि निफ्टी में 486.85 अंक में गिरावट आई थी।

शेयर बाजार मंगलवार को ‘महावीर जयंती’ के मौके पर बंद रहेंगे।

भाषा रमण अजय

अजय