प्राकृतिक गैस, एलपीजी की कमी : जिंदल स्टील ने भट्टियों में ‘सिंथेसिस गैस’ का इस्तेमाल शुरू किया
प्राकृतिक गैस, एलपीजी की कमी : जिंदल स्टील ने भट्टियों में ‘सिंथेसिस गैस’ का इस्तेमाल शुरू किया
नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) जिंदल स्टील ने प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी से निपटने के लिए ‘गैल्वनाइजिंग’ एवं ‘कलर कोटिंग’ लाइन की भट्टियों में ‘सिंथेसिस गैस’ (सिंगैस) का इस्तेमाल शुरू किया है। इससे आपूर्ति में व्यवधान के बीच भी कंपनी को संचालन जारी रखने में मदद मिली है।
‘सिंगैस’ या ‘सिंथेसिस गैस’ स्वच्छ रूप से जलने वाला ईंधन है जो अपशिष्ट एवं जैविक पदार्थों को उपयोगी ऊर्जा में बदलने का माध्यम प्रदान करता है।
कंपनी के अनुसार कोयले के गैसीकरण से तैयार ‘सिंगैस’ के उपयोग से इन महत्वपूर्ण अंतिम प्रसंस्करण प्रक्रियाओं में ईंधन की कमी को दूर करने में मदद मिली है। इन प्रक्रियाओं में उच्च तापमान वाली भट्टियां आवश्यक होती हैं जिनका उपयोग निर्माण, उपकरण तथा वाहन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली इस्पात पट्टियों (स्ट्रिप) पर जस्ता एवं रंग की परत चढ़ाने के लिए किया जाता है।
‘गैल्वनाइजिंग लाइन’ भट्टियां इस्पात पर सुरक्षा के लिए जस्ता की परत चढ़ाती हैं जबकि ‘कलर कोटिंग लाइन’ भट्टियां धातु पर लगाए गए कार्बनिक रंग को पकाती हैं। ये दोनों प्रक्रियाएं, जंग प्रतिरोध एवं टिकाऊपन बढ़ाने के लिए लगातार और तेज गति वाली उत्पादन लाइन में संचालित होती हैं।
कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा, ‘‘ प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी के मद्देनजर जिंदल स्टील ने गैल्वनाइजिंग तथा कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में ‘सिंगैस’ का सफलतापूर्वक उपयोग शुरू किया है। इस्पात उद्योग में इस तरह का यह पहला प्रयोग है। इससे इन असाधारण परिस्थितियों में ईंधन की कमी से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिली है।’’
इसमें कहा गया कि कंपनी ने कोयला गैसीकरण आधारित देश का पहला प्रत्यक्ष अपचयन लोहा (डीआरआई) संयंत्र स्थापित कर वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहल की है, जिसमें लोहे के उत्पादन के लिए ‘सिंगैस’ का उपयोग किया जाता है।
जिंदल स्टील ने कहा कि उसने अपने ब्लास्ट फर्नेस में ‘सिंगैस इंजेक्शन’ की पहल भी की है जिससे आयातित कोकिंग कोयले पर निर्भरता कम हुई है तथा प्रति टन इस्पात कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आई है।
जिंदल स्टील के अंगुल संयंत्र के कार्यकारी निदेशक पी. के. बीजू नायर ने कहा, ‘‘ स्वदेशी कोयले से तैयार ‘सिंथेसिस गैस’ आयातित मेथनॉल, अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का विकल्प बन सकती है। भारत को अपने विशाल कोयला भंडार का उपयोग करके भविष्य में कम कार्बन उत्सर्जन वाली वृद्धि को सुनिश्चित करना चाहिए और विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को कम करना चाहिए।’’
गौरतलब है कि 12 अरब डॉलर से अधिक के निवेश के साथ जिंदल स्टील के संयंत्र ओडिशा के अंगुल, छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और झारखंड के पतरातू में स्थित हैं। कंपनी का भारत तथा अफ्रीका में भी रणनीतिक परिचालन है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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