Amit Jogi Life Imprisonment News: ‘देर आए, दुरुस्त आए..’, चर्चित जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को आजीवन कारावास, सीएम साय ने कह दी ये बड़ी बात
Amit Jogi Life Imprisonment News: छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्याय व्यवस्था से जुड़ा बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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- अमित जोगी को उम्रकैद की सजा
- हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत
- जग्गी हत्याकांड में बड़ा निर्णय
Amit Jogi Life Imprisonment News: बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्याय व्यवस्था से जुड़ा बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपलोड किए गए आदेश में स्पष्ट रूप से आजीवन कारावास का उल्लेख किया गया है, जिससे मामले में लंबी चली कानूनी प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण पर पहुंच गई है। इस फैसले को राज्य में एक बड़े और संवेदनशील मामले के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर लंबे समय से नजर बनी हुई थी।
Amit Jogi News: सीएम साय ने क्या कहा ?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि न्यायपालिका का यह फैसला सराहनीय है और “देर आए, दुरुस्त आए” की कहावत को चरितार्थ करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में अमित जोगी को मुख्य आरोपी माना गया है और अब न्याय की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, वहीं पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने से राहत की भावना देखी जा रही है।
बता दें कि, जग्गी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हाई कोर्ट ने आदेश की कॉपी पोर्टल पर अपलोड कर दी है। इससे पहले मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायाजलय ने बृहस्पतिवार को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को 2003 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले (Jaggi Murder Case) में दोषी ठहराया और उन्हें तीन सप्ताह के भीतर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
Jaggi Murder Case: क्या है पूरा मामला?
बता दें कि राकांपा नेता रामावतार जग्गी की हत्या चार जून, 2003 को हुई थी, जब अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। इस मामले की शुरुआती जांच राज्य पुलिस ने की थी। राज्य में 2003 में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद रमन सिंह की सरकार ने इस मामले को सीबीआई को सौंप दिया था। सीबीआई ने अमित जोगी समेत कई अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था।
रायपुर की एक अदालत ने 31 मई, 2007 को फैसला सुनाया कि अभियोजन पक्ष ने 28 आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है। हालांकि, अदालत ने अमित जोगी को उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया था। सीबीआई ने इस फैसले को चुनौती दी थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने देरी के आधार पर 2011 में जांच एजेंसी की याचिका खारिज कर दी थी। छत्तीसगढ़ सरकार तथा मृतक रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की अलग-अलग याचिका भी खारिज कर दी गई थी। पिछले साल नवंबर में उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय से कहा था कि वह सीबीआई की उस याचिका पर फिर से विचार करे जिसमें जोगी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगी गई थी।
जानिए कौन थे रामावतार जग्गी
रामावतार जग्गी छत्तीसगढ़ के एक कारोबारी और राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्ति थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का दामन थामा, तो जग्गी भी उनके साथ जुड़ गए और उन्हें राज्य में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। उनकी राजनीतिक सक्रियता और प्रभाव के चलते वे क्षेत्र में एक अहम चेहरा बन गए थे।
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