संदेश ऐप के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ी

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संदेश ऐप के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ी

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  • Publish Date - April 2, 2026 / 10:52 AM IST,
    Updated On - April 2, 2026 / 10:52 AM IST

नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) सरकार ने व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसे मोबाइल संदेश ऐप के लिए ‘सिम-बाइंडिंग’ नियम लागू करने की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। उद्योग जगत की मांग के बाद यह फैसला लिया गया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

‘सिम-बाइंडिंग’ नियम के तहत संदेश मंच को मोबाइल पर अपनी सेवा तभी उपलब्ध करानी होगी, जब उसमें सक्रिय सिम कार्ड मौजूद हो।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने ऐप के वेब संस्करण के लिए अनिवार्य छह घंटे के लॉग-आउट नियम को भी बदलकर जोखिम विश्लेषण आधारित लॉग-आउट प्रणाली लागू करने का फैसला किया है।

डीओटी ने 28 नवंबर 2025 को प्रमुख ऐप-आधारित संचार सेवा प्रदाताओं को निर्देश जारी कर कहा था कि वे 26 फरवरी से सेवाओं को उपकरण में सक्रिय सिम कार्ड से लगातार जोड़कर रखें और 28 मार्च तक अनुपालन रिपोर्ट दें।

एक अधिकारी ने बताया, ‘‘ उद्योग से मिले अनुरोधों के बाद सरकार ने ‘सिम-बाइंडिंग’ नियम लागू करने की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है।’’

पहले जारी निर्देशों में संदेश मंच के वेब संस्करण से छह घंटे बाद उपयोगकर्ताओं को स्वतः लॉग-आउट करने का प्रावधान था। अब इसके बजाय एआई आधारित जोखिम विश्लेषण के आधार पर लॉग-आउट किया जाएगा।

डीओटी ने यह नियम इसलिए प्रस्तावित किया था क्योंकि साइबर अपराधी बड़े पैमाने पर डिजिटल धोखाधड़ी के लिए इस खामी का फायदा उठा रहे थे।

विभाग के अनुसार, इंस्टेंट मैसेजिंग और कॉलिंग ऐप के खाते संबंधित सिम हटाने, निष्क्रिय होने या विदेश ले जाने के बाद भी सक्रिय रहते हैं जिससे गुमनाम ठगी, ‘रिमोट डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी और भारतीय नंबर का इस्तेमाल कर सरकारी अधिकारी बनकर कॉल करने जैसी घटनाएं संभव हो जाती हैं।

डीओटी का कहना है कि सक्रिय सिम से निरंतर ‘डिवाइस-बाइंडिंग’ और समय-समय पर लॉग-आउट से हर सक्रिय खाते और वेब को केवाईसी-प्रमाणित सिम से जोड़ा जा सकेगा, जिससे ‘फिशिंग’, निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और ऋण घोटालों में इस्तेमाल होने वाले नंबर का पता लगाना आसान होगा।

उद्योग जगत ने हालांकि इस कदम का विरोध किया है। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम (बीआईएफ) ने इस नियम की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए हैं। बीआईएफ जो मेटा, गूगल जैसी बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

डीओटी सचिव अमित अग्रवाल को 23 फरवरी को लिखे पत्र में बीआईएफ ने एक वरिष्ठ वकील की राय का हवाला देते हुए कहा कि टेलीकम्युनिकेशंस (टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी) संशोधन नियम, 2025 और सिम-बाइंडिंग से जुड़े निर्देश 2023 के मूल टेलीकम्युनिकेशंस अधिनियम के दायरे से बाहर एवं असंवैधानिक हो सकते हैं।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा