लघु जलविद्युत परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण: श्रीपद येसो नाइक

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लघु जलविद्युत परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार के लिहाज से महत्वपूर्ण: श्रीपद येसो नाइक

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 04:28 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 04:28 PM IST

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपद येसो नाइक ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में लघु जलविद्युत की विशिष्ट भूमिका है। लघु जलविद्युत परियोजनाएं ऊर्जा सुरक्षा, विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन, रोजगार और दूरदराज के क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, नाइक ने भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 में लघु जलविद्युत पर आयोजित होने वाले विशेष सत्र के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में उल्लेखनीय बदलाव आया है और देश वैश्विक ऊर्जा बदलाव में अग्रणी बनकर उभरा है।

उल्लेखनीय है कि देश में 25 मेगावाट क्षमता तक की जलविद्युत परियोजनाओं को लघु पनबिजली की श्रेणी में रखा जाता है।

मंत्री ने कहा, ‘‘देश में गैर-जीवाश्म यानी स्वच्छ ईंधन आधारित स्थापित बिजली क्षमता 300 गीगावाट (एक गीगावाट बराबर 1,000 मेगावाट) के स्तर को पार कर गई है। भारत के ऊर्जा बदलाव की ताकत देश की भौगोलिक स्थिति, संसाधनों और विकास संबंधी जरूरतों के अनुरूप विविध, संतुलित और मजबूत ऊर्जा स्रोतों का मिश्रण तैयार करने में है।’’

बयान के अनुसार, नाइक ने कहा, ‘‘देश में लघु जलविद्युत की मौजूदा अनुमानित क्षमता करीब 21 गीगावाट है। यह 7,100 से अधिक चिन्हित स्थलों पर उपलब्ध है। इनमें से अभी केवल करीब 5.2 गीगावाट क्षमता का ही उपयोग किया गया है। इससे इस क्षेत्र में आगे विकास की बड़ी संभावना का पता चलता है।’’

उन्होंने कहा कि लघु जलविद्युत का महत्व केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। तकनीकी और पर्यावरणीय रूप से संभव होने पर उचित तरीके से तैयार की गई नदी प्रवाह (रन ऑफ रिवर) आधारित परियोजनाओं में अपेक्षाकृत कम भूमि की जरूरत होती है और बड़े जलाशय आधारित परियोजनाओं की तुलना में बड़े पैमाने पर भूमि डूबने तथा विस्थापन से बचा जा सकता है।

नाइक ने कहा, ‘‘लघु जलविद्युत बिजली की खपत वाले क्षेत्रों के नजदीक भरोसेमंद नवीकरणीय बिजली उपलब्ध करा सकती है, विकेंद्रीकृत बिजली उत्पादन को मजबूत कर सकती है और खासकर भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत बना सकती है। यह क्षेत्र रोजगार सृजित करने, स्थानीय उद्यमों को समर्थन देने और दूरदराज के क्षेत्रों में आर्थिक अवसर पैदा करने में भी मदद कर सकता है।’’

उन्होंने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए प्रस्तावित लघु जलविद्युत विकास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लिए 2,584.60 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया गया है और करीब 1,500 मेगावाट नई लघु जलविद्युत क्षमता जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

नाइक ने कहा कि योजना के तहत राज्यों को करीब 200 परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे भविष्य में लघु जलविद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए परियोजनाओं का एक मजबूत आधार तैयार होगा।

मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी सहायता से इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयाग संभव नहीं है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों, परियोजना विकासकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी है।

उन्होंने नीतिगत स्थिरता, मंजूरी की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, कारोबार सुगमता बढ़ाने, केंद्र-राज्य समन्वय मजबूत करने और परियोजनाओं को वित्तीय रूप से अधिक व्यवहार्य बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

नाइक ने कहा कि दो से पांच नवंबर, 2026 तक नयी दिल्ली में होने वाला भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026 का विशेष लघु जलविद्युत सत्र नीतिगत सुधार, निवेश, वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी और साझेदारी पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि जलविद्युत परियोजनाएं शुरू करने में लगने वाला लंबा समय एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने कहा कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने खासकर लघु जलविद्युत परियोजनाओं के मामले में समय पर मंजूरी देने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद अनावश्यक देरी होने पर उसकी सूचना देने और मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

सचिव ने लघु जलविद्युत परियोजनाओं को वित्तीय रूप से अधिक व्यावहारिक बनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इनके विशिष्ट नकदी प्रवाह को देखते हुए दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में विभिन्न संबंधित पक्षों के अलावा वरिष्ठ अधिकारी तथा अनुसंधान और उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

भाषा रमण अजय

अजय योगेश

योगेश