मातृशक्ति के सम्मान से गढ़ता यूपी का नया भविष्य

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UP Women Power News: नारी शक्ति, सृजन और समाज की धुरी है जिसे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव से आगे बढ़ा रही है।

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 04:30 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 04:30 PM IST

UP Women Power News/Image Credit: File

HIGHLIGHTS
  • हमारे धार्मिक ग्रंथों में नारी को शक्ति कहा गया है।
  • नारी शक्ति, सृजन और समाज की धुरी है।
  • उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव से आगे बढ़ा रही है

लखनऊ: हमारे धार्मिक ग्रंथों में नारी को शक्ति कहा गया है। यह शक्ति केवल पूजने से नहीं आती, बल्कि उसे अवसर, अधिकार और सम्मान देकर उसकी ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने से प्रस्फुटित होती है। नारी शक्ति, सृजन और समाज की धुरी है जिसे उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के भाव से आगे बढ़ा रही है, जो हमारी सनातन सभ्यता की मूल चेतना का उदघोष है। किंतु नारी का असली सम्मान तब तक पूर्ण नहीं होता, जब तक कि उसके श्रम का सम्मान न किया जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के मानदेय में बढ़ोतरी करके सम्मान की इस श्रृंखला को आगे बढ़ाया है। सरकार के इस फैसले के सामाजिक अर्थ बहुत व्यापक हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को राज्य की सरकारी व्यवस्था की महज एक इकाई के रूप में नहीं देखा जा सकता। वे गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य तथा प्रारंभिक देखभाल की पहली पंक्ति में खड़ी होती हैं। उनके श्रम का सम्मान वस्तुतः आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य का सम्मान है।

यह विडंबना ही है कि एक दशक पहले तक यूपी की सरकारें नारी के सम्मान की बात तो करती रहीं, लेकिन व्यवहार में उन्हें हाशिये पर ही धकेला जाता रहा। चाहे वह श्रम का प्रतिफल हो या सामाजिक सुरक्षा का अधिकार, हमेशा उनकी अनदेखी हुई। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका और रसोइया जैसी लाखों महिलाएं समाज की नींव को सींचती रहीं, पर बदले में उन्हें वह सब नहीं मिला जिसकी वे वास्तविक रूप से हकदार रहीं। यही वह पृष्ठभूमि है जिसमें योगी सरकार के नारी सम्मान को केंद्र में रखकर लिए गए फैसले महत्वपूर्ण हो जाते हैं। वह चाहे आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाना हो, रसोइयों को उनके श्रम का सही प्रतिदान दिया जाना हो, साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना हो, स्नातक की छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा हो या फिर ग्रामीण महिलाओं को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना हो, सभी में एक व्यापक संदेश है। यह संदेश योगी सरकार की सोच का प्रतिबिंब है कि नारी सहायता की पात्र नहीं है, वह विकास की शक्ति है। सरकार की नीतियों में मातृशक्ति का सम्मान अब घोषणाओं से आगे बढ़कर मानदेय, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, गतिशीलता और कानून-व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में स्पष्ट दिखाई देता है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में वृद्धि और उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा की बात करते हैं। यह सिर्फ एक निर्णय भर नहीं, व्यवस्थागत परिवर्तन का संदेश है जिसमें मानवीय संवेदना के साथ नारी गरिमा और श्रम का सम्मान है। 2017 में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को महज तीन हजार रुपये मानदेय मिलता था। योगी सरकार ने इसे परफॉर्मेंस आधारित व्यवस्था से जोड़ते हुए आठ हजार रुपये किया। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये किया गया। सहायिकाओं का मानदेय भी 1,500 रुपये से बढ़ाकर पहले चार हजार और अब छह हजार रुपये किया गया। इसके साथ ही कैशलेस इलाज की सुविधा इन्हें स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्त करेगी। ये सब इसके हकदार थे क्योंकि इनका सेवा भाव अतुलनीय है। याद करें कोरोना काल की महामारी को, ये आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां ही थीं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालते हुए गांव-गांव स्क्रीनिंग से लेकर दस्तक अभियान और संक्रमित लोगों की सेवा की।

सीएम योगी ने कहा कि सभी आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं के साथ उनके परिवार को हर वर्ष पांच लाख रुपये तक कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। इसका लाभ इम्पैनल्ड अस्पतालों के साथ सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में लिया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने सम्मान भाव में ही इनके लिए अब दो से तीन साड़ियों की व्यवस्था की है।नएक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल एक सरकारी कर्मचारी नहीं होती, वह समाज की उस पहली कड़ी की तरह होती है जो गर्भवती माताओं से लेकर नवजात शिशुओं तक की देखभाल का दायित्व निभाती है। जब यह कड़ी सशक्त होती है, तो पूरा सामाजिक ताना-बाना मजबूत होता है।

इसी क्रम में योगी सरकार के एक और निर्णय की चर्चा जरूरी है। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन से पहले प्रदेश की 3.54 लाख रसोइया बहनों को जो चार बड़े उपहार दिए, वे भी भावनात्मक और व्यावहारिक, दोनों दृष्टि से उल्लेखनीय हैं। रसोइया माताओं-बहनों का मानदेय 2 हजार से बढ़ाकर 3 हजार रुपये करना, दुर्घटना की स्थिति में स्टेट बैंक के माध्यम से दो लाख रुपये की सहायता और प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की मुफ्त कैशलेस चिकित्सा सुविधा देना, तथा परिधान राशि को दोगुना कर 500 से 1000 रुपये करना। ये सभी निर्णय महिलाओं की समग्र सामाजिक सुरक्षा की चिंता करते हैं।

नारी सशक्तीकरण की यह यात्रा यहीं नहीं रुकती। लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना का शुभारंभ इस बात का प्रतीक है कि सरकार वृद्ध महिलाओं की गतिशीलता और स्वतंत्रता को भी उतना ही महत्व देती है जितना युवा पीढ़ी के सपनों को। साठ वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देना एक ऐसा कदम है जो उन्हें आर्थिक निर्भरता से मुक्त कर सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदार बनाता है। दूसरी ओर, स्नातक में अध्ययनरत 50 हजार बेटियों को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी प्रदान करने की योजना युवा छात्राओं के सपनों को पंख देने जैसी है। शिक्षा तक पहुंच और गतिशीलता, दोनों को सुनिश्चित करती यह पहल बेटियों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देगी।

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