भारत के दम पर दक्षिण एशिया बना वृद्धि का सबसे चमकदार केंद्रः डब्ल्यूईएफ रिपोर्ट

भारत के दम पर दक्षिण एशिया बना वृद्धि का सबसे चमकदार केंद्रः डब्ल्यूईएफ रिपोर्ट

भारत के दम पर दक्षिण एशिया बना वृद्धि का सबसे चमकदार केंद्रः डब्ल्यूईएफ रिपोर्ट
Modified Date: January 16, 2026 / 08:42 pm IST
Published Date: January 16, 2026 8:42 pm IST

नयी दिल्ली,16 जनवरी (भाषा) हाल में वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में मामूली सुधार के बावजूद अधिकतर शीर्ष अर्थशास्त्री इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के कमजोर पड़ने की आशंका जता रहे हैं लेकिन भारत के दम पर दक्षिण एशिया वृद्धि का सबसे चमकदार केंद्र बना हुआ है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में यह बात कही।

डब्ल्यूईएफ की दावोस वार्षिक बैठक शुरू होने से पहले जारी ‘मुख्य अर्थशास्त्रियों का परिदृश्य’ शीर्षक से जारी रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मामूली सुधार हुआ है लेकिन अनिश्चितताएं बरकरार हैं। परिसंपत्ति मूल्यांकन, बढ़ता कर्ज, भू-आर्थिक बदलाव और कृत्रिम मेधा (एआई) को तेजी से अपनाना अवसर और जोखिम दोनों पैदा कर रहा है।

दुनिया भर की सार्वजनिक एवं निजी संस्थाओं के मुख्य अर्थशास्त्रियों के बीच कराए गए सर्वे में शामिल लगभग 53 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कहा कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में इस वर्ष गिरावट आ सकती है। हालांकि सितंबर, 2025 में ऐसी राय रखने वाले मुख्य अर्थशास्त्रियों का अनुपात 72 प्रतिशत था।

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रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया उभरते क्षेत्रों के बीच शीर्ष पर बरकरार है। रिपोर्ट कहती है, ‘दक्षिण एशिया उभरते क्षेत्रों के बीच वृद्धि का सबसे चमकदार केंद्र बना हुआ है। भारत व्यापार में चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद इस परिदृश्य को प्रमुख आधार प्रदान कर रहा है।’

रिपोर्ट कहती है कि भारत सुधारों के सिलसिले को जारी रखे हुए है। रोजगार से जुड़ी बंदिशों में कटौती और अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों से निवेश के साथ एआई को तेजी से अपनाया जा रहा है।

डब्ल्यूईएफ ने कहा कि सर्वे में 36 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने अगले दो वर्षों में एआई निवेश से महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताई है।

महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों की बात करें तो भारतीय निर्यात पर अमेरिका में लगे उच्च शुल्क के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में अर्थव्यवस्था में ‘गोल्डीलॉक्स’ स्थिति का आकलन किया, जिसमें सितंबर तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि और लगभग शून्य मुद्रास्फीति देखी गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशिया में मुद्रास्फीति से जुड़ी अपेक्षाएं कम हुई हैं और दो-तिहाई अर्थशास्त्री मौद्रिक नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने की उम्मीद कर रहे हैं।

वैश्विक परिदृश्य में 2026 के लिए तीन मुख्य रुझान उभरकर आए हैं। इनमें एआई निवेश एवं इसके आर्थिक प्रभाव, कर्ज का बढ़ता बोझ और व्यापार परिदृश्य में बदलाव शामिल हैं।

डब्ल्यूईएफ की प्रबंध निदेशक सादिया जाहिदी ने कहा, “सरकारों और कंपनियों को अल्पावधि की अनिश्चित परिस्थितियों में जुझारूपन बनाए रखना होगा, जबकि वृद्धि के दीर्घकालिक बुनियादी पहलुओं में निवेश जारी रखना होगा।”

इस रिपोर्ट से क्षेत्रीय विकास में भारत की प्रमुख भूमिका भी उजागर हुई। करीब 66 प्रतिशत अर्थशास्त्री दक्षिण एशिया में मजबूत या बहुत मजबूत वृद्धि की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि अमेरिका में 69 प्रतिशत को मध्यम वृद्धि की संभावना दिख रही है। चीन को लेकर मिश्रित दृष्टिकोण है जबकि यूरोप में वृद्धि को लेकर सबसे कमजोर उम्मीदें हैं।

करीब 54 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों की तेजी के बाद सोना अब अपने चरम स्तर पर पहुंच चुका है जबकि 62 प्रतिशत ने क्रिप्टोकरेंसी में आगे और गिरावट की आशंका जताई है।

रिपोर्ट कहती है कि एआई रोजगार पर मिश्रित असर डालेगा। शुरू में कुछ नुकसान होगा, लेकिन समय के साथ नई नौकरियां और अवसर भी पैदा होंगे, जिससे कुल प्रभाव क्षेत्र और उद्योग पर निर्भर करेगा।

भाषा प्रेम प्रेम रमण

रमण


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