अंतरिक्ष डेटा केंद्रों के लिए अगला बड़ा स्थान होगा: सिस्को

अंतरिक्ष डेटा केंद्रों के लिए अगला बड़ा स्थान होगा: सिस्को

अंतरिक्ष डेटा केंद्रों के लिए अगला बड़ा स्थान होगा: सिस्को
Modified Date: January 20, 2026 / 12:40 pm IST
Published Date: January 20, 2026 12:40 pm IST

(बरुण झा)

दावोस, 20 जनवरी (भाषा) प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सिस्को के अध्यक्ष एवं मुख्य उत्पाद अधिकारी जीतू पटेल ने कहा कि कृत्रिम मेधा और उन्नत कंप्यूटिंग के कारण विशाल डेटा केंद्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए दुनिया को बहुत जल्द अंतरिक्ष में डेटा केंद्र देखने को मिलेंगे।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक से इतर ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में पटेल ने कहा कि हरित डेटा सेंटर जल्द ही बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं लेकिन अगले कुछ वर्ष में बिजली जैसी बुनियादी ढांचे की बाधाओं से निपटने के लिए अंतरिक्ष में डेटा सेंटर बनते देखने को मिलेंगे।

 ⁠

उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर की बात करें तो शीतलन की जरूरत बहुत अधिक होती है क्योंकि एक ‘रैक’ के कुल वजन का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा शीतलन अवसंरचना का होता है।

पटेल ने कहा, ‘‘ अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा की तीव्रता पृथ्वी की तुलना में कहीं अधिक होती है, जिससे शीतलन की लागत और आर्थिक अनुपात यहां की तुलना में बिल्कुल अलग स्तर पर हो सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ ऊर्जा की उपलब्धता भी अधिक होती है, इसलिए उनके अनुसार साथ-साथ अंतरिक्ष में भी डेटा सेंटर विकसित किए जाएंगे।’’

सिस्को के अध्यक्ष ने साथ ही मानव इतिहास में कृत्रिम मेधा (एआई) को सबसे बड़ा वैश्विक बदलाव बताते हुए कहा कि यह हमारे जीवन जीने के तरीके को बदल देगी लेकिन कुछ बाधाएं हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है।

पटेल ने कहा कि एआई से हर नौकरी का स्वरूप बदल जाएगा और हर कार्यप्रवाह में परिवर्तन आएगा।

उन्होंने हालांकि आगाह किया कि अधिकतर लोग अल्पावधि में इन प्रौद्योगिकियों के प्रभाव को बहुत अधिक आंकते हैं, जबकि दीर्घावधि में वे इसे बहुत कम आंकते हैं।

पटेल ने तीन प्रमुख बाधाओं बुनियादी ढांचा, विश्वास और डेटा की कमी का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘ पहली बाधा यह है कि हमारे पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा नहीं है, कृत्रिम मेधा की जरूरतों को पूरा करने के लिए दुनिया में पर्याप्त बिजली, कंप्यूटिंग एवं नेटवर्क बैंडविड्थ नहीं है। दूसरी बड़ी बाधा भरोसे की कमी है। भरोसे की कमी से मेरा मतलब यह है कि अगर आप इन प्रणालियों पर भरोसा नहीं कर सकते, तो आप इनका उपयोग नहीं करेंगे। इसलिए सुरक्षा इन प्रणालियों को अपनाने के लिए अनिवार्य शर्तें बन जाती हैं।’’

पटेल ने कहा, ‘‘फिर तीसरी बाधा हम डेटा की कमी को मानते हैं क्योंकि अब तक इन कृत्रिम मेधा मॉडल को मानव-निर्मित डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है जो इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। हालांकि इसके बावजूद इंटरनेट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मानव-निर्मित डेटा की कमी होने लगी है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में