बॉम्बे डाइंग मामले में सैट के आदेश पर रोक से उच्चतम न्यायालय का इनकार

बॉम्बे डाइंग मामले में सैट के आदेश पर रोक से उच्चतम न्यायालय का इनकार

बॉम्बे डाइंग मामले में सैट के आदेश पर रोक से उच्चतम न्यायालय का इनकार
Modified Date: July 13, 2026 / 04:01 pm IST
Published Date: July 13, 2026 4:01 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें बॉम्बे डाइंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड और उसके प्रवर्तक समूह के कुछ सदस्यों के खिलाफ सेबी के निर्देश को निरस्त कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सैट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की याचिका पर नोटिस जारी किया।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश 2:1 के बहुमत से दिए जाने की वजह से समान मामलों में मिसाल के रूप में नहीं देखा जाएगा।

इससे पहले सेबी ने प्रतिभूति कानूनों एवं सूचीबद्धता मानकों के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए बॉम्बे डाइंग और उससे जुड़े कुछ व्यक्तियों पर पूंजी बाजार तक पहुंच तथा सूचीबद्ध कंपनियों में प्रमुख पद संभालने पर अंकुश जैसी पाबंदियां लगाई थीं।

यह मामला जून, 2021 में कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद शुरू हुई कार्यवाही से जुड़ा है। इसमें कंपनी के तत्कालीन और पूर्व प्रवर्तकों, निदेशकों तथा एससीएएल सर्विसेज लिमिटेड से जुड़े व्यक्तियों को शामिल किया गया था।

सैट ने 16 जनवरी के अपने फैसले में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य द्वारा 2022 में दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया था।

सेबी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि बॉम्बे डाइंग की एससीएएल में पहले 49 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसे 29 मार्च, 2012 को घटाकर 19 प्रतिशत से कम कर दिया गया, जिसके बाद एससीएएल उसकी सहयोगी कंपनी नहीं रही। उन्होंने कहा कि 30 प्रतिशत हिस्सेदारी किसी स्वतंत्र तीसरे पक्ष को देने के बजाय समूह की ही दूसरी इकाई को हस्तांतरित की गई।

दातार ने कहा कि इसके अगले ही दिन एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया गया और अगले दो वर्षों में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 11 एमओयू निष्पादित किए गए।

उन्होंने सैट के आदेश पर रोक की अपील करते हुए कहा कि बहुमत का फैसला सहयोगी कंपनियों, कॉरपोरेट आवरण हटाने और ‘एकल आर्थिक इकाई’ जैसे सिद्धांतों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।

वहीं, वाडिया समूह और बॉम्बे डाइंग की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और डेरियस खंबाटा ने कहा कि कंपनी ने सभी लागू कानूनी और नियामकीय प्रावधानों का पालन किया था। नुस्ली वाडिया के वकील ने कहा कि सैट ने तथ्यों के आधार पर उन्हें पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है।

पीठ ने वाडिया समूह के वकीलों को सेबी की याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

यह विवाद मुंबई में फ्लैटों की थोक बिक्री के लिए बॉम्बे डाइंग और एससीएएल सर्विसेज लिमिटेड के बीच हुए 11 समझौता ज्ञापनों से जुड़ा है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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