अदालत ने बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना जीएसटी पंजीकरण पर लगाई रोक

अदालत ने बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना जीएसटी पंजीकरण पर लगाई रोक

अदालत ने बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना जीएसटी पंजीकरण पर लगाई रोक
Modified Date: September 10, 2026 / 05:23 pm IST
Published Date: September 10, 2026 5:23 pm IST

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना माल एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण की अनुमति नहीं देने का आदेश दिया है।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की पीठ ने उन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया जिनमें याचिकाकर्ताओं के पैन कार्ड और आधार कार्ड नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण किए जाने का आरोप लगाया गया था।

पीठ ने आठ सितंबर को पारित आदेश में कहा कि इससे पहले संसद में फर्जी जीएसटी पंजीकरण से जुड़े एक सवाल के जवाब में संबंधित मंत्री ने बताया था कि 2023-24 में 2,800 फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले सामने आए थे, जिनमें 15,085 करोड़ रुपये की कर चोरी हुई थी। वहीं, 2024-25 में 1,654 फर्जी पंजीकरण और 13,109 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला था।

पीठ ने कहा कि हालांकि यह भी बताया गया था कि जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार के जरिये बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया जाएगा, लेकिन इस व्यवस्था को अबतक लागू नहीं किया गया है। इसके कारण चोरी किए गए या निष्क्रिय किए गए पैन और आधार विवरण का इस्तेमाल कर लगातार फर्जी पंजीकरण किए जा रहे हैं।

अदालत ने कहा कि अधिकारी ऐसी व्यवस्था अनिवार्य करने में किसी कठिनाई को प्रदर्शित करने में विफल रहे हैं। उसने आदेश दिया, ‘‘इसलिए, फिलहाल देशभर के सभी अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे आगे से बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण के बिना किसी भी जीएसटी पंजीकरण की अनुमति न दें।’’

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार को होने वाले राजस्व के नुकसान और निर्दोष लोगों को हो रही परेशानी से निपटने के लिए उसने शुरू में अधिकारियों से ‘‘स्थिति के अनुरूप कदम उठाने’’ का आग्रह किया था और उनसे इस मामले को पूरी गंभीरता से देखने की उम्मीद की थी।

अदालत ने अधिकारियों को इसके क्रियान्वयन में किसी व्यावहारिक कठिनाई के संबंध में आपत्ति दर्ज कराने की स्वतंत्रता दी और मामले को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

अदालत ने अपने पहले के आदेश में कहा था कि अधिकारी इस बात से इनकार नहीं कर सके कि निर्दोष नागरिकों के पैन कार्ड और आधार कार्ड नंबर का इस्तेमाल कर किए गए फर्जी जीएसटी पंजीकरण, 2017 में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम लागू होने के बाद से बड़े पैमाने पर होते रहे हैं।

अदालत ने कहा था, ‘‘करीब नौ वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी प्रतिवादी इन गलत प्रथाओं पर अंकुश लगाने में विफल रहे हैं। इससे न केवल उन नागरिकों को परेशानी होती है, जिनका ऐसे जीएसटी पंजीकरण से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि सरकार को भी भारी राजस्व नुकसान होता है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय


लेखक के बारे में