टाटा संस ने चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन बनाने को मंजूरी दी, टाटा ट्रस्ट की असहमति

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टाटा संस ने चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन बनाने को मंजूरी दी, टाटा ट्रस्ट की असहमति

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 06:34 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 06:34 PM IST

मुंबई, 17 सितंबर (भाषा) टाटा संस के निदेशक मंडल ने बृहस्पतिवार को एन चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने को मंजूरी दी और कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया।

हालांकि, टाटा संस में निर्णायक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए इसे ‘अवैध’ बताया।

टाटा समूह के मुख्यालय ‘बॉम्बे हाउस’ में निदेशक मंडल की करीब तीन घंटे चली बैठक में ये फैसले लिए गए। यह बैठक चंद्रशेखरन के अगस्त में निदेशक मंडल को यह बताने के कुछ सप्ताह बाद हुई कि 20 फरवरी, 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह पुनर्नियुक्ति नहीं चाहते।

टाटा संस ने एक बयान में कहा, ‘‘निदेशक मंडल की 17 सितंबर, 2026 को हुई बैठक में चंद्रशेखरन ने बोर्ड के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई। इसके बाद बोर्ड ने मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए उन्हें कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पुनर्नियुक्त करने का बहुमत से फैसला किया।’’

इसके साथ ही, निदेशक मंडल ने टाटा संस की सूचीबद्धता संबंधी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का अनुपालन करने की दिशा में कदम उठाने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि वह अनुपालन संबंधी शर्तों पर आरबीआई, टाटा ट्रस्ट और अन्य हितधारकों से मार्गदर्शन लेगी।

निदेशक मंडल के दोनों फैसलों को टाटा संस की आगामी सालाना आम बैठक (एजीएम) में मंजूरी लेनी होगी।

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने निदेशक मंडल की बैठक में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया। ट्रस्ट ने कहा कि चंद्रशेखरन को टाटा संस के चेयरमैन के रूप में फिर नियुक्त करने का प्रस्ताव ‘अवैध’ है और चयन समिति को कंपनी के अंतर्नियमों के अनुरूप अपनी प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए।

सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान किया, लेकिन प्रस्ताव बोर्ड में बहुमत से पारित हो गया। सूत्रों ने कहा कि टाटा ट्रस्ट इस फैसले को आगे चुनौती दे सकता है।

निदेशक मंडल का यह फैसला गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के रूप में पंजीकरण समाप्त करने की टाटा संस की अर्जी आरबीआई द्वारा खारिज किए जाने के बाद आया है। इस फैसले से कंपनी की शेयर बाजार में सूचीबद्धता की संभावना फिर बढ़ गई है।

टाटा संस पिछले एक साल से बाजार सूचीबद्धता से बचने के प्रयास कर रही थी और इस क्रम में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी चुका चुकी है।

सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड के सदस्यों का मानना था कि सूचीबद्धता की प्रक्रिया शुरू होने से पहले नेतृत्व में निरंतरता संभावित निवेशकों को भरोसा देगी। आमतौर पर आईपीओ प्रक्रिया शुरू होने पर संभावित निवेशक प्रबंधन की निरंतरता को लेकर आश्वासन चाहते हैं।

टाटा संस ने कहा कि नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति (एनआरसी) ने चंद्रशेखरन के योगदान और टाटा समूह के व्यापक हितों को देखते हुए उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने तथा अगली बोर्ड बैठक में उनकी पुनर्नियुक्ति की सिफारिश करने का सर्वसम्मति से फैसला किया।

चंद्रशेखरन ने तीसरे कार्यकाल की मांग नहीं करने का फैसला बोर्ड में उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर सर्वसम्मति नहीं बनने के बीच किया था।

टाटा ट्रस्ट की सूचीबद्धता को लेकर भी आपत्तियां रही हैं। आरबीआई ने 11 सितंबर को टाटा संस की खुद को प्रमुख निवेश कंपनी के रूप में पंजीकरण से बाहर करने की अर्जी खारिज कर दी थी। ऐसा होने पर कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की अनिवार्यता से छूट मिल सकती थी।

आरबीआई ने 2022 में टाटा संस को ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी के तहत तीन साल के भीतर सूचीबद्ध होना जरूरी था। यह समयसीमा सितंबर, 2025 में समाप्त हो गई, जबकि पंजीकरण से बाहर होने की अर्जी पर विचार चल रहा था। सूचीबद्धता से छूट हासिल करने के प्रयास में टाटा संस ने अपना बकाया कर्ज चुका दिया था।

सूचीबद्धता के फैसले ने टाटा ट्रस्ट के भीतर भी मतभेद को उजागर कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन को सूचीबद्धता के खिलाफ मतदान करने के लिए बाध्य करने की कोशिश की थी, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया।

सूत्रों ने कहा कि आरबीआई के फैसले को कानूनी चुनौती केवल टाटा संस ही दे सकती है, ट्रस्ट सीधे तौर पर नहीं।

चंद्रशेखरन फरवरी, 2017 से टाटा संस का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने साइरस मिस्त्री को हटाए जाने के बाद अंतरिम चेयरमैन बने रतन टाटा की जगह ली थी। वर्ष 2022 में उन्हें सर्वसम्मति से पांच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए फिर नियुक्त किया गया था।

टाटा ट्रस्ट ने 2025 में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का समर्थन किया था, लेकिन फरवरी, 2026 में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। उस समय नोएल टाटा ने एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसी कंपनियों में हुए नुकसान पर चिंता जताई थी और टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने समेत कुछ शर्तें रखी थीं।

बृहस्पतिवार का मतदान चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश के लिए जारी प्रक्रिया को भी रोक सकता है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने इसके लिए औपचारिक प्रक्रिया शुरू की थी, जिसमें टाटा स्टील के सीईओ टीवी नरेंद्रन, टाटा संस के समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल और एनएसई के सीईओ आशीष कुमार चौहान दावेदार थे।

टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पलोनजी समूह ने अपनी हिस्सेदारी का मूल्य हासिल करने और कर्ज चुकाने में मदद के लिए सूचीबद्धता की पैरवी की है।

टाटा संस की संभावित सूचीबद्धता भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकती है। एक प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री से अनुमानित 15,000-20,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं, जिससे समूह का मूल्यांकन करीब 20 लाख करोड़ रुपये (लगभग 230 अरब डॉलर) बैठता है।

टाटा संस की इस्पात, वाहन, सॉफ्टवेयर सेवाओं, आतिथ्य और विमानन क्षेत्रों की एक दर्जन से अधिक सूचीबद्ध कंपनियों में नियंत्रक हिस्सेदारी है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

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