ईपीएफओ की 25,000 रुपये की वेतन सीमा पर्याप्त नहीं, देर से उठाया कदम: श्रमिक संगठन एटक

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ईपीएफओ की 25,000 रुपये की वेतन सीमा पर्याप्त नहीं, देर से उठाया कदम: श्रमिक संगठन एटक

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  • Publish Date - September 17, 2026 / 06:27 PM IST,
    Updated On - September 17, 2026 / 06:27 PM IST

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) श्रमिक संगठन ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि वेतन सीमा में यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है और फैसला काफी देर से लिया गया है।

ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने बयान में कहा कि पात्र कर्मचारियों के अधिक वर्ग को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए वेतन सीमा बढ़ाकर 30,000 रुपये की जानी चाहिए।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ईपीएफओ द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया।

एटक ने कहा कि 12 साल के अंतराल के बाद कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की वेतन सीमा बढ़ाने का केंद्रीय मंत्रिमंडल का फैसला श्रमिक संगठनों की लंबे समय से लंबित मांग पर देर से उठाया गया कदम है।

संगठन ने कहा कि वेतन सीमा में आखिरी बार सितंबर 2014 में संशोधन किया गया था। तब से वेतन, कीमतों और जीवन-यापन की लागत में काफी वृद्धि हुई है।

उसने कहा कि वेतन सीमा बढ़ाने की मांग सरकार और ईपीएफओ के समक्ष बार-बार उठाई गई है। वर्ष 2022 में 15,000 रुपये की सीमा बढ़ाने की बढ़ती मांग संसद में भी औपचारिक रूप से उठाई गई थी।

एटक ने कहा कि ईपीएफओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड में कर्मचारी प्रतिनिधियों ने वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मांग की थी। फरवरी 2024 में इस संबंध में एक विशेष प्रस्ताव भी रखा गया था।

उसने कहा कि इसके बावजूद सरकार ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, जिससे 15,000 रुपये से अधिक वेतन पाने वाले लाखों कर्मचारी ईपीएफओ की अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे से बाहर रहे।

श्रमिक संगठन ने कहा कि इसलिए मौजूदा फैसले को न तो समय पर उठाया गया कदम माना जा सकता है और न ही 25,000 रुपये की नई वेतन सीमा को पर्याप्त कहा जा सकता है।

संगठन ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था कर्मचारियों की आय में होने वाले बदलाव के अनुरूप होनी चाहिए। इसमें न्यूनतम वेतन, वास्तविक वेतन, महंगाई और जीवन-यापन की लागत को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर बदलाव किया जाना चाहिए।

एटक ने कहा, ‘‘वेतन सीमा में यह संशोधन पर्याप्त नहीं है और काफी देर से किया गया है। हमारी मांग है कि पात्र कर्मचारियों के अधिक वर्ग को शामिल करने के लिए वेतन सीमा बढ़ाकर 30,000 रुपये की जाए।’’

उसने कहा कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का लाभ कर्मचारियों के मासिक वेतन में कमी की कीमत पर नहीं मिलना चाहिए।

भाषा योगेश रमण

रमण