बिजली संशोधन विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में किया जा सकता है पेश

बिजली संशोधन विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में किया जा सकता है पेश

बिजली संशोधन विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में किया जा सकता है पेश
Modified Date: January 19, 2026 / 05:58 pm IST
Published Date: January 19, 2026 5:58 pm IST

नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को कहा कि बिजली संशोधन विधेयक संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

इस विधेयक का उद्देश्य विद्युत क्षेत्र में सुधार लाना और ऋण में डूबी बिजली वितरण कंपनियों की लाभप्रदता सुनिश्चित करना है।

मंत्री ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आईआईटी दिल्ली-सीईआरसी-ग्रिड इंडिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन के अवसर पर कही।

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विद्युत मंत्रालय ने रविवार को बताया था कि कई वर्षों तक घाटे में रहने के बाद विद्युत वितरण कंपनियों ने वित्त वर्ष 2024-25 में संयुक्त रूप से 2,701 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया है।

मंत्रालय ने कहा कि हालांकि करीब 50 वितरण कंपनियां अब भी घाटे में हैं।

सभी वितरण कंपनियों को लाभप्रद बनाने की रणनीतियों पर लाल ने कहा, ‘‘ अगले बजट सत्र में हम विद्युत अधिनियम में संशोधन करने जा रहे हैं ताकि वितरण कंपनियों को घाटा न हो और उन्हें समय पर भुगतान प्राप्त हो सके।’’

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा को बताया कि विद्युत अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा करने के लिए राज्य प्रतिनिधियों के साथ एक परामर्श बैठक भी आयोजित की जा रही है।

सरकारी दस्तावेज के अनुसार, विद्युत (संशोधन) विधेयक 2025 का उद्देश्य संघीय संतुलन बनाए रखना, सहकारी संचालन को बढ़ावा देना, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना और क्षेत्र की दक्षता में सुधार करना भी है।

बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025 पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों में कहा गया कि ये संशोधन न केवल वित्तीय अनुशासन के माध्यम से विद्युत वितरण क्षेत्र को मजबूत करेंगे बल्कि विद्युत क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत ढांचा भी प्रदान करेंगे।

सरकार द्वारा अधिनियम में संशोधन लाने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों की भी कई वर्गों द्वारा आलोचना की गई है।

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया है कि विधेयक में कई वितरण लाइसेंसधारियों को सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के मौजूदा नेटवर्क का उपयोग करने का प्रस्ताव है।

एआईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा, ‘‘ यह विधेयक निजीकरण के उद्देश्यों का समर्थन करता है। केंद्र सरकार विद्युत (संशोधन) नियमों के माध्यम से अपने निजीकरण एजेंडे को आगे बढ़ा रही है।’’

भाषा निहारिका रमण

रमण


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