नए आयकर फॉर्म में एचआरए लाभ के लिए मकान मालिक के साथ रिश्ता भी बताना होगा

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नए आयकर फॉर्म में एचआरए लाभ के लिए मकान मालिक के साथ रिश्ता भी बताना होगा

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  • Publish Date - February 25, 2026 / 04:56 PM IST,
    Updated On - February 25, 2026 / 04:56 PM IST

नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) सरकार ने नए आयकर अधिनियम, 2025 के तहत मसौदा आयकर नियम और फॉर्म जारी किए हैं, जिनमें किराया भत्ते (एचआरए) के दावों में पारदर्शिता बढ़ाने, विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों की कड़ी जांच और ऑडिटर की जिम्मेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव है।

नया आयकर अधिनियम एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा। सरकार ने हितधारकों के लिए नियमों का मसौदा एवं फॉर्म जारी किए हैं। इसके आधार पर अंतिम नियम एवं फॉर्म अगले महीने अधिसूचित किए जाएंगे।

नियमों के मसौदे के मुताबिक, नए फॉर्म 124 में करदाता को यह बताना होगा कि वह जिस मकान मालिक को किराया दे रहा है, उससे उसका कोई पारिवारिक या कोई अन्य संबंध तो नहीं है।

फिलहाल एचआरए का दावा करते समय कर्मचारी अपने नियोक्ता को किराये का अनुमानित विवरण देता है, लेकिन मकान मालिक के साथ संबंध का खुलासा करना अनिवार्य नहीं है।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच के संबंधों का खुलासा अनिवार्य किए जाने से फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए किराया दावों पर अंकुश लगेगा।

नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स फर्म में साझेदार संदीप झुनझुनवाला ने कहा, ‘‘यह प्रावधान वास्तविक व्यवस्थाओं को प्रभावित किए बगैर कृत्रिम दावों की पहचान में मदद करेगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अनुचित दावों को खारिज करना आसान होगा।’’

नियमों के मसौदे में विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के खुलासे के लिए ऑडिटर के साथ कंपनियों की भी जवाबदेही बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।

विदेशी आय पर कर क्रेडिट के दावों के लिए प्रस्तावित फॉर्म 44 में ऑडिटर की भूमिका और सख्त की गई है। अब चार्टर्ड अकाउंटेंट को विदेशी टैक्स कटौती प्रमाणपत्र, भुगतान का प्रमाण, विनिमय दर रूपांतरण और कर संधि की पात्रता की स्वतंत्र जांच करनी होगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह उन मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है जहां विदेशी देशों में एकीकृत कर विवरण जारी होते हैं या कर को अलग वित्त वर्ष में अदा किया जाता है।

मसौदा प्रस्ताव में कंपनियों के लिए पैन आवेदन प्रक्रिया भी सख्त की गई है। अब आवेदन करते समय यह घोषणा देना अनिवार्य होगा कि कंपनी के पास पहले से से कोई पैन नहीं है।

शाखाओं, परियोजना कार्यालयों या पूर्ववर्ती इकाइयों के नाम पर पहले से पैन होने की स्थिति में दोहराव से बचने के लिए आंतरिक जांच जरूरी होगी।

झुनझुनवाला ने कहा कि यह प्रावधान डेटाबेस की शुचिता मजबूत करेगा, लेकिन आवेदकों की जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा।

नए कर ऑडिट फॉर्म 26 में यह अनिवार्य किया गया है कि वैधानिक ऑडिटर की रिपोर्ट में यदि कोई प्रतिकूल टिप्पणी, अस्वीकरण या पात्रता है तो उसका आय, हानि या बुक प्रॉफिट पर प्रभाव स्पष्ट किया जाए।

उदाहरण के लिए, यदि राजस्व मान्यता, शेयर मूल्यांकन या प्रावधान में कमी पर आपत्ति दर्ज होती है, तो कर ऑडिटर को देखना होगा कि इससे कर-योग्य आय को कम करके तो नहीं दिखाया गया।

इसके अलावा, कर ऑडिट रिपोर्ट में इस्तेमाल किए गए अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, क्लाउड या सर्वर का विवरण, आईपी पता, डेटा भंडारण का देश और भारत में स्थित बैकअप सर्वर का पता भी बताना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि नए प्रावधानों से अनुपालन की लागत बढ़ सकती है लेकिन इससे पारदर्शिता और जवाबदेही में मजबूती आने की संभावना है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय