(Narasimha Dwadashi 2026/ Image Credit: IBC24 News Customize)
Narasimha Dwadashi 2026: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नरसिंह द्वादशी मनाई जाती है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र और शक्तिशाली अवतार नरसिंह को समर्पित होता है। यह व्रत होली से पहले आता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में नरसिंह द्वादशी का व्रत 28 फरवरी को मनाया जाएगा। यह तिथि होलिका दहन से कुछ दिन पहले आती है, जिससे इसे होली के पर्व से भी जोड़ा जाता है। नरसिंह द्वादशी और होली दोनों का महत्व एक जैसे है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
नरसिंह द्वादशी का गहरा संबंध भक्त प्रह्लाद से है। प्रह्लाद दैत्यराज हिरण्यकश्यप का पुत्र था, जो भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने की कई कोशिशें की, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने उसकी रक्षा की। अंत में भगवान नरसिंह ने खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया। यह घटना धर्म की अधर्म पर जीत का प्रतीक मानी जाती है, जो होलिका दहन से जुड़ी हुई है।
नरसिंह द्वादशी का व्रत होली से पहले आता है क्योंकि यह भक्ति और सत्य की जीत का प्रतीक है। होलिका दहन में अहंकार और अत्याचार का अंत होता है, जबकि नरसिंह द्वादशी भगवान नरसिंह के उस उग्र रूप का स्मरण कराती है, जिसने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अपने उग्र रूप में प्रकट होकर बुराई का नाश किया। दोनों ही पर्व एक साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।
नरसिंह द्वादशी व्रत करने के लिए सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, चंदन, धूप और दीप अर्पित करें। इस दिन विष्णु सहस्रनाम या नरसिंह स्तोत्र का पाठ करें। व्रत के अंत में शाम को आरती करें और फलाहार ग्रहण करें। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में सुख-शांति का वास होता है।