गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल संग्रह शुक्रवार से शुरू

गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल संग्रह शुक्रवार से शुरू

गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल संग्रह शुक्रवार से शुरू
Modified Date: May 15, 2026 / 07:11 pm IST
Published Date: May 15, 2026 7:11 pm IST

लखनऊ, 15 मई (भाषा) गंगा एक्सप्रेसवे पर टोल संग्रह शुक्रवार को शुरू हो गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 दिन के लिए टोल नहीं लिए जाने की घोषणा की थी जिसकी अवधि समाप्त हो गयी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हरदोई जिले से गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया था। 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। यह देश के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे में से एक है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क सुविधा में सुधार करना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने लोगों को बिना किसी शुल्क के राज्य के सबसे लंबे एक्सप्रेसवे का अनुभव देने के लिए वाणिज्यिक संचालन की तारीख से 15 दिनों की टोल छूट की घोषणा की थी। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने परियोजना का विकास करने वाली आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स लिमिटेड और अदाणी इंफ्रास्ट्रक्चर को इस अवधि के दौरान टोल संग्रह निलंबित करने का निर्देश दिया था।

अधिकारियों ने कहा था कि इस कदम का उद्देश्य परियोजना में व्यापक सार्वजनिक उपयोग, पर्यटन और विश्वास को बढ़ावा देना है।

डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) के आधार पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत विकसित इस परियोजना के लिए कंपनियों को 27 वर्षों के लिए टोल संग्रह अधिकार दिए गए हैं।

अधिकारियों ने पहले कहा था कि टोल-फ्री अवधि के दौरान किसी भी राजस्व हानि की भरपाई समझौते के अनुसार राज्य सरकार या यूपीडा द्वारा की जाएगी।

यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘गंगा एक्सप्रेसवे को चार खंडों में विभाजित किया गया है – मेरठ से बदायूँ (129.7 किमी), बदायूँ से हरदोई (151.7 किमी), हरदोई से उन्नाव (155.7 किमी), और उन्नाव से प्रयागराज (156.847 किमी) – प्रत्येक खंड के लिए टोल शुल्क की अलग-अलग गणना की गई है। कुल देय टोल वाहन की श्रेणी और इन हिस्सों में तय की गई दूरी पर निर्भर करता है।

भाषा चंदन जफर

जितेंद्र रमण

रमण


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