Dhar Bhojshala Verdict: ‘हम वहां नमाज पढ़ना जारी रखेंगे…’,भोजशाला फैसले के बाद शहर काजी का बड़ा बयान, अब उठाएंगे ये कदम

Dhar Bhojshala Verdict: ‘हम वहां नमाज पढ़ना जारी रखेंगे…’,भोजशाला फैसले के बाद शहर काजी का बड़ा बयान, अब उठाएंगे ये कदम

Dhar Bhojshala Verdict: ‘हम वहां नमाज पढ़ना जारी रखेंगे…’,भोजशाला फैसले के बाद शहर काजी का बड़ा बयान, अब उठाएंगे ये कदम

shahar kazi/ image source: ibc24

Modified Date: May 15, 2026 / 06:11 pm IST
Published Date: May 15, 2026 6:11 pm IST
HIGHLIGHTS
  • भोजशाला में जश्न का माहौल
  • हाई कोर्ट ने मंदिर माना
  • ASI रिपोर्ट बनी अहम आधार

Dhar Bhojshala Verdict: धार: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा धार स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर पर ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद पूरे शहर में जश्न का माहौल देखने को मिला। अदालत ने भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना की अनुमति दे दी है। फैसले के बाद भोज उत्सव समिति के सदस्य, आंदोलनकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु अखंड ज्योति मंदिर पहुंचे, जहां मां वाग्देवी और भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इसे सनातन आस्था और वर्षों से चल रहे आंदोलन की बड़ी जीत बताया। वहीं, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भोजशाला परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

कोर्ट ने ASI सर्वे रिपोर्ट को अहम आधार माना

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ASI सर्वे रिपोर्ट को अहम आधार माना। सर्वे के दौरान परिसर से कई खंडित देवी-देवताओं की मूर्तियां मिली थीं, जबकि दीवारों पर धार्मिक आकृतियां और राजा भोज काल की नक्काशी भी सामने आई थी। ASI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के अवशेषों और खंभों का पुनः उपयोग कर किया गया था। अदालत ने केंद्र सरकार से लंदन म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को भारत वापस लाने पर भी विचार करने को कहा है, जिसके बाद प्रतिमा वापसी की मांग तेज हो गई है।

शहर काजी ने क्या किया?

हालांकि, फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। शहर काजी ने ASI की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि कई साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया और रिपोर्ट सिर्फ एक पक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई। उन्होंने कहा कि 2003 का आदेश नमाज को जारी रखने के लिए था और यहां सदियों से नमाज होती आ रही है। काजी ने यह सवाल भी उठाया कि धारा 144 लागू होने के बावजूद हिंदू पक्ष द्वारा आतिशबाजी और नारेबाजी कैसे की गई। उन्होंने दावा किया कि 1935 के गजट नोटिफिकेशन और मराठा स्टेट के रिकॉर्ड में भी इसे मस्जिद बताया गया है। गौरतलब है कि भोजशाला विवाद 11वीं सदी में राजा भोज द्वारा निर्मित स्थल को लेकर है, जहां हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत विश्वविद्यालय मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है।

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लेखक के बारे में

पत्रकारिता और क्रिएटिव राइटिंग में स्नातक हूँ। मीडिया क्षेत्र में 3 वर्षों का विविध अनुभव प्राप्त है, जहां मैंने अलग-अलग मीडिया हाउस में एंकरिंग, वॉइस ओवर और कंटेन्ट राइटिंग जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दिया। IBC24 में मैं अभी Trainee-Digital Marketing के रूप में कार्यरत हूँ।