इस साल राखी पर कुल कारोबार 30,000 करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान : कैट
इस साल राखी पर कुल कारोबार 30,000 करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान : कैट
नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) राजधानी के बाजारों में इस साल बिक रही राखियों में भाई-बहन के प्यार के पारंपरिक संदेश के अलावा और भी बहुत कुछ है। इनमें स्वदेशी गर्व और सरकारी पहल – जैसे विकसित भारत, ब्रह्मोस और महिला सशक्तीकरण – की झलक मिलती है। साथ ही, व्यापारियों का अनुमान है कि देश में राखी का व्यापार लगभग 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, मिठाई, सूखे मेवे, उपहार, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान सहित राखी त्योहार पर कुल व्यापार 30,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है। अकेले दिल्ली में इस व्यापार का हिस्सा लगभग 4,000 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है।
रक्षा बंधन 28 अगस्त को है। त्योहार से पहले दिल्ली के बाजारों – जैसे चांदनी चौक, सदर बाजार, करोल बाग, लाजपत नगर, कमला नगर, राजौरी गार्डन, गांधी नगर, खारी बावली और लक्ष्मी नगर – में खरीदारों की भीड़ उमड़ रही है।
भाजपा सांसद और कैट के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, ‘‘पहले राखियां ज्यादातर चीन से आती थीं। वर्ष 2020 के बाद यह भावना बनी कि हमें अपने स्थानीय और स्वदेशी उत्पाद बनाने चाहिए।’’ उन्होंने ग्राहकों की सोच में आए इस बदलाव को वर्ष 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद की स्थिति से जोड़ा।
खंडेलवाल ने आगे कहा कि युवा ग्राहकों के बीच मुद्दे-आधारित राखियों की मांग खास तौर पर देखी जा रही है, जबकि ‘नारी वंदन’ और ‘लखपति दीदी’ राखियां महिला खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं।
लेकिन बाजार सिर्फ साफ तौर पर राजनीतिक डिजाइनों तक ही सीमित नहीं है। कारीगर क्षेत्रीय परंपराओं का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। नागपुर की खादी राखियां, जयपुर की सांगानेरी आर्ट वाली राखियां, पुणे की बीज वाली राखियां, असम की चाय-पत्ती वाली राखियां, कोलकाता की जूट वाली राखियां, और बिहार की बांस और मधुबनी आर्ट वाली राखियां भी बेची जा रही हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों को पसंद किए जाने से महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और कारीगरों को मौसमी अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका मिल रही है।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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