श्रमिक संगठन एक अप्रैल को मनाएंगे ‘काला दिवस’, श्रम सुधारों के खिलाफ करेंगे विरोध प्रदर्शन

श्रमिक संगठन एक अप्रैल को मनाएंगे ‘काला दिवस’, श्रम सुधारों के खिलाफ करेंगे विरोध प्रदर्शन

श्रमिक संगठन एक अप्रैल को मनाएंगे ‘काला दिवस’, श्रम सुधारों के खिलाफ करेंगे विरोध प्रदर्शन
Modified Date: March 27, 2026 / 06:08 pm IST
Published Date: March 27, 2026 6:08 pm IST

नयी दिल्ली, 27 मार्च (भाषा) केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ने सरकार की चार श्रम संहिताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर एक अप्रैल 2026 को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का शुक्रवार को आह्वान किया।

सरकार ने चार श्रम संहिताएं…वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता 2020 को 21 नवंबर 2025 को लागू किया है।

बयान के अनुसार, केंद्रीय श्रमिक संगठनों और स्वतंत्र क्षेत्रीय महासंघों एवं संगठनों के मंच ने श्रमिक संघों से एक अप्रैल को ‘काला दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है। इसी दिन केंद्र सरकार ने चारों श्रम संहिताओं के लागू करने को लेकर नियमों को अधिसूचित करने की घोषणा की है।

बयान में कहा गया कि श्रमिक संगठन लगातार इन श्रम संहिताओं का विरोध करते रहे हैं और ‘‘व्यापार सुगमता’’ को बढ़ावा देने के नाम पर लाए गए इन कथित श्रमिक विरोधी एवं नियोक्ता समर्थक कानूनों को रद्द करने की मांग करते रहे हैं।

इसमें कहा गया कि 12 फरवरी की ऐतिहासिक आम हड़ताल के बाद भी केंद्र सरकार श्रम संहिता को वापस लेने या इस मुद्दे पर केंद्रीय श्रमिक संगठनों के साथ कोई सार्थक बैठक बुलाने को इच्छुक नहीं है।

संगठनों ने आरोप लगाया कि इन श्रम संहिताओं के मसौदा तैयार करने के चरण से ही श्रम संगठना से कोई परामर्श नहीं किया गया और देश के श्रमिक वर्ग के जीवन से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर चर्चा के लिए कोई भारतीय श्रम सम्मेलन नहीं बुलाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का उल्लंघन है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों पर एक राष्ट्र के रूप में हस्ताक्षर किए हैं।

श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि इन श्रम संहिताओं का उद्देश्य देश के श्रमिक वर्ग (जो देश की संपदा का सृजन करते हैं) को एक बार फिर ब्रिटिश औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों की ओर धकेलना है।

बयान में कहा गया, ‘‘ हम, केंद्रीय श्रम संगठन, समाज के सभी वर्गों से इस विरोध कार्यक्रम को समर्थन देने की अपील करते हैं, ताकि संगठन बनाने के अधिकार एवं सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार को बनाए रखा जा सके तथा अपने वैध अधिकारों के लिए विरोध/संघर्ष करने के अधिकार को सुनिश्चित किया जा सके, जिनकी परिकल्पना श्रम कानूनों के संहिताकरण के माध्यम से की गई थी।’’

उन्होंने कहा कि एक अप्रैल को देशभर के सभी कार्यस्थलों पर ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया जाना चाहिए। इसे राज्य इकाइयों के संयुक्त एवं स्वतंत्र निर्णय के अनुसार विभिन्न रूपों में मनाया जाना चाहिए और इसमें एसकेएम (संयुक्त किसान मोर्चा) का एकजुटता समर्थन भी रहेगा।

इसे कार्यस्थलों पर काले बैज, बांह या माथे पर काली पट्टी पहनकर, ‘लंच’ के दौरान नारेबाजी के साथ विरोध करके, जहां संभव हो वहां धरना एवं जुलूस, साइकिल/मोटरसाइकिल जत्थों या अन्य तरीकों से मनाया जाना चाहिए।

श्रम संगठना के इस संयुक्त मंच में एआईटीयूसी, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं।

भाषा निहारिका रमण

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