न्यूयॉर्क, 14 जनवरी (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की नीतियों को लेकर बैंकों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने ‘व्हाइट हाउस’ को मंगलवार को आगाह किया और कहा कि ये कार्रवाइयां अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जुलाई में ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पर हस्ताक्षर करके इसे कानून का रूप दिया था। तब इस विधेयक ने कर कटौती के एक और महत्वपूर्ण दौर को आगे बढ़ाया और साथ ही उपभोक्ता वित्तीय संरक्षण ब्यूरो के बजट में भी लगभग आधी कटौती की गई जो कई बार बैंकिंग उद्योग का कट्टर दुश्मन रहा है।
ट्रंप के नेतृत्व में बैंक नियामकों ने भी एक विनियमन-मुक्ति एजेंडा को आगे बढ़ाया है जिसे बैंकों और बड़ी कंपनियों दोनों ने अपनाया है। हालांकि अब अचानक इन संबंधों में खटास आ गई है क्योंकि राष्ट्रपति ने क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर पर एक साल के लिए 10 प्रतिशत की सीमा लगाने का प्रस्ताव रखा है जिसके बारे में कई लोगों का कहना है कि यह उस संस्था के लिए खतरा है जिसे राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त होकर ब्याज दरें निर्धारित करनी चाहिए।
बैंकों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ को मंगलवार को आगाह किया कि ट्रंप की कार्रवाइयां अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाएंगी।
बीएनवाई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी रॉबिन विंस ने पत्रकारों से कहा कि फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता पर सवाल उठाना ‘‘ हमें ऐसा नहीं लगता कि प्रशासन के उन प्राथमिक उद्देश्यों को पूरा कर रहा है जो सामर्थ्य, उधार लेने की लागत को कम करने, उधारी ऋण की लागत को कम करने और अमेरिकियों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी की लागत को कम करने जैसे मुद्दों से संबंधित हैं।’’
विंस ने कहा, ‘‘ हमें बॉन्ड बाजार की नींव को हिलाना नहीं चाहिए और ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे ब्याज दरें वास्तव में बढ़ जाएं, क्योंकि किसी तरह फेड की स्वतंत्रता में विश्वास की कमी है।’’
बड़े बैंकों के बीच फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता सर्वोपरि है। हालांकि बैंक चाहते होंगे कि पॉवेल और फेड के अन्य नीति निर्माता ब्याज दरों में तेजी से बदलाव करें लेकिन वे आम तौर पर समझते हैं कि पॉवेल ने ऐसा क्यों किया है।
जेपी मॉर्गन चेस के सीईओ जेमी डिमोन ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘ मैं फेडरल रिजर्व द्वारा किए गए सभी कार्यों से सहमत नहीं हूं लेकिन जे पॉवेल के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है।’’
फेडरल रिजर्व पर हमलों के साथ-साथ राष्ट्रपति ट्रंप क्रेडिट कार्ड उद्योग को भी निशाना बना रहे हैं। इस साल के मध्यावधि चुनावों में ‘‘किफायती लागत’’ एक अहम मुद्दा होने की संभावना को देखते हुए ट्रंप, उपभोक्ताओं के लिए लागत कम करना चाहते हैं और उनका कहना है कि वे 20 जनवरी तक क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर 10 प्रतिशत की सीमा लागू करना चाहते हैं।
अमेरिकन एक्सप्रेस, जेपी मॉर्गन, सिटीग्रुप, कैपिटल वन और अन्य क्रेडिट कार्ड कंपनियों के शेयर में सोमवार को भारी गिरावट आई क्योंकि निवेशकों को इस बात की चिंता थी कि यदि ब्याज दर पर सीमा लागू की जाती है तो इन बैंकों के मुनाफे पर संभावित रूप से क्या असर पड़ सकता है।
जेपी मॉर्गन के मुख्य वित्तीय अधिकारी जेफरी बार्नम ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया कि उद्योग, ट्रंप प्रशासन को उन दरों पर सीमा लगाने से रोकने के लिए अपने पास मौजूद सभी संसाधनों के साथ लड़ने को तैयार है।
जेपी मॉर्गन ने हाल ही में गोल्डमैन सैक्स से एप्पल कार्ड क्रेडिट कार्ड खंड का अधिग्रहण किया है।
डेल्टा एयर लाइन्स के सीईओ एड बैस्टियन ने मंगलवार को विश्लेषकों से कहा, ‘‘ मुझे लगता है कि (संभावित सीमा) के साथ एक बड़ा मुद्दा और चुनौती यह है कि यह वास्तव में निम्न वर्ग के उपभोक्ता को किसी भी प्रकार के क्रेडिट तक पहुंच से प्रतिबंधित कर देगा, न कि केवल उनके द्वारा भुगतान की जा रही ब्याज दर को, जिससे पूरा क्रेडिट कार्ड उद्योग उलट जाएगा।’’
डेल्टा की अमेरिकन एक्सप्रेस के साथ एक बड़ी साझेदारी है और इसका को-ब्रांड क्रेडिट कार्ड डेल्टा के लिए अरबों डॉलर का राजस्व लाता है।
ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रंप ने रातोंरात क्रेडिट कार्ड उद्योग पर अपने हमलों को और तेज कर दिया है।
अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने जानकारी दी कि उन्होंने सीनेटर रोजर मार्शल, आर-कैनसस द्वारा पेश किए गए एक विधेयक का समर्थन किया है। इससे संभवतः बैंकों द्वारा व्यापारियों से अर्जित राजस्व में कटौती होगी जब भी वे बिक्री स्थल पर क्रेडिट कार्ड स्वीकार करेंगे।
ट्रंप ने लिखा, ‘‘ सभी को महान रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल के क्रेडिट कार्ड प्रतिस्पर्धा अधिनियम का समर्थन करना चाहिए ताकि अनियंत्रित ‘स्वाइप’ शुल्क की लूट को रोका जा सके।’’
एपी निहारिका मनीषा
मनीषा