उप्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी: वैश्विक मंच पर चमका प्रदेश की ग्रामीण महिला उद्यमियों का हुनर

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उप्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी: वैश्विक मंच पर चमका प्रदेश की ग्रामीण महिला उद्यमियों का हुनर

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  • Publish Date - September 27, 2026 / 07:49 PM IST,
    Updated On - September 27, 2026 / 07:49 PM IST

ग्रेटर नोएडा, 27 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के गांवों और कस्बों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद अब स्थानीय बाजारों की सीमा लांघकर बड़े बाजार में अपनी धाक जमा रहे हैं। यहां जारी उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी में राज्य के सभी 75 जिलों से पहुंचीं महिला उद्यमियों ने अपने पारंपरिक शिल्प और उद्यमशीलता से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर पेश की है।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए यह मंच महज उत्पाद बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बाजार की मांग और बड़े खरीदारों की पसंद समझने का सीधा अवसर दे रहा है।

व्यापार प्रदर्शनी में राज्य की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता साफ झलकती है। पारंपरिक हस्तशिल्प में जहां आगरा की जरी-जरदोजी, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, कन्नौज का इत्र, गोरखपुर की टेराकोटा ज्वेलरी और वाराणसी के कालीन आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं।

इन ग्रामीण महिलाओं ने रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। खाद्य एवं प्राकृतिक उत्पादों में अयोध्या की हर्बल चाय, अमरोहा के पिसे मसाले, प्रतापगढ़ का आंवला-मुरब्बा और सोनभद्र का शहद शामिल हैं। इसके अलावा सिद्धार्थनगर में केले के रेशे से बने उत्पाद, चित्रकूट और सहारनपुर के लकड़ी के खिलौने तथा बुलंदशहर की खुर्जा पॉटरी भी यहां प्रदर्शित की गई है।

दैनिक उपयोग और स्वच्छता श्रेणी में भी स्वयं सहायता समूहों ने उल्लेखनीय पैठ बनाई है। बलिया, जौनपुर और मुजफ्फरनगर के स्टॉलों पर फिनाइल, डिशवॉश, हर्बल साबुन और डिटर्जेंट जैसे घरेलू उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि ग्रामीण उद्यमिता अब केवल पारंपरिक कला तक सीमित नहीं है।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि महिला समूहों का दायरा अब पारंपरिक शिल्प से आगे बढ़कर बहुआयामी हो चुका है।

उन्होंने कहा, ”स्वयं सहायता समूहों के लिए केवल उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें बड़े बाजार और ग्राहकों तक पहुंचाना सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी जैसे मंच इस दूरी को पाट रहे हैं। सभी 75 जिलों के उत्पादों को एक साथ प्रदर्शित करने से इन महिला उद्यमियों को सीधे संस्थागत खरीदारों और शहरी ग्राहकों से जुड़ने का मौका मिला है।”

भाषा संतोष पाण्डेय

पाण्डेय