नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) पांच दिवसीय कार्य सप्ताह और अन्य लंबित मांगों को लेकर बैंक यूनियनों द्वारा सोमवार से तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल शुरू किए जाने से चेक क्लीयरेंस, नकद निकासी और जमा सहित बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।
हड़ताल का मुख्य असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, पुरानी पीढ़ी के निजी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में देखने को मिल सकता है। हालांकि डिजिटल बैंकिंग और अन्य ऑनलाइन सेवाओं के सामान्य रूप से चालू रहने की संभावना है।
इसके अलावा, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक जैसे नई पीढ़ी के निजी बैंकों की शाखाएं इन तीन दिनों के दौरान खुली रहेंगी।
यह तीन दिवसीय हड़ताल 11 सितंबर को आयोजित एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बाद की जा रही है।
सार्वजनिक क्षेत्र के ज्यादातर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल और उससे होने वाली संभावित असुविधा के बारे में बता दिया है।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने ग्राहकों को जारी परामर्श में कहा कि बैंक शाखाओं और कार्यालयों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने की हर कोशिश की जाएगी, फिर भी हड़ताल के दौरान कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
एसबीआई ने कहा, ”इसलिए ग्राहकों से अनुरोध है कि वे किसी भी असुविधा से बचने के लिए हड़ताल की प्रस्तावित तारीखों से काफी पहले अपने आवश्यक बैंकिंग लेनदेन पूरे कर लें। ग्राहकों से यह भी आग्रह किया जाता है कि वे नकदी की जरूरतों के लिए एटीएम और नकद जमा मशीनों का उपयोग करें तथा जहां तक संभव हो योनो, इंटरनेट/मोबाइल बैंकिंग, यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों का सहारा लें।”
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सात संगठनों के शीर्ष निकाय यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने इस हड़ताल का आह्वान किया है। यूएफबीयू ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग की मांग कई वर्षों से लंबित है। यूनियन नेताओं के अनुसार मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हाल में हुई सुलह बैठकों के दौरान सरकार ने पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया।
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (एआईबीओसी) के महासचिव रूपम रॉय ने कहा, ”सरकार और प्रबंधन के अड़ियल रुख के कारण यूनियनों को आंदोलन का रास्ता चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”
यूनियनों का तर्क है कि कई सरकारी और वित्तीय संस्थानों में पहले से ही सप्ताह में पांच दिन काम की व्यवस्था लागू है।
नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (एनसीबीई) के महासचिव एल चंद्रशेखर ने कहा, ”केंद्र और राज्य सरकार के कार्यालयों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), एलआईसी, जीआईसी, नाबार्ड और कई अन्य संस्थानों में पहले से ही पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है। शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार भी सप्ताह में केवल पांच दिन ही काम करते हैं।”
पांच दिवसीय बैंकिंग के अलावा यूनियनें कई अन्य मुद्दों के समाधान की भी मांग कर रही हैं। इनमें पेंशन लाभों को सुधारना, सभी पेंशनभोगियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता (डीए) फॉर्मूला लागू करना और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में लौटने का विकल्प देना शामिल है।
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में बैंक कर्मचारियों से हड़ताल का रास्ता न अपनाने और बातचीत के जरिए बाकी मांगों को सुलझाने की अपील की थी। मंत्रालय ने कहा था कि यूनियनों की ज्यादातर चिंताओं का पहले ही काफी हद तक समाधान किया जा चुका है।
मंत्रालय ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना को वापस लेने की मांग पर विस्तृत चर्चा के बाद इस महीने की शुरुआत में इसे स्थगित कर दिया गया था।
भाषा पाण्डेय
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