नयी दिल्ली, 27 सितंबर (भाषा) सोने और चांदी में अगले सप्ताह भी उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। विश्लेषकों ने यह अनुमान जताया है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर इसका असर बहुमूल्य धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
छुट्टियों के कारण छोटा कारोबारी सप्ताह होने के बीच बाजार की नजर अमेरिका के उपभोक्ता विश्वास, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और व्यक्तिगत उपभोग व्यय (पीसीई) मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर रहेगी।
यूरोजोन की मुद्रास्फीति, विनिर्माण पीएमआई, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयान और अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी बाजार को दिशा देंगे।
एलकेपी सिक्योरिटीज के जिंस एवं मुद्रा शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि बाजार की नजर अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़ों पर रहेगी, जो अक्टूबर में फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले की उम्मीदों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
पिछले सप्ताह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 3,500 रुपये यानी करीब 2.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी का वायदा भाव भी 6,907 रुपये यानी तीन प्रतिशत की गिरावट के साथ 2.34 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर रहा।
वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर दिसंबर के आपूर्ति वाले सोने का वायदा भाव 103.7 डॉलर यानी 2.34 प्रतिशत गिरकर 4,321.2 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.35 डॉलर यानी 3.5 प्रतिशत टूटकर 64.80 डॉलर प्रति औंस रह गई।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा शोध) प्रणव मेर ने कहा कि सोने पर दबाव केवल मुद्रा बाजार से नहीं है। अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2007 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है, जबकि 30 साल की यील्ड 2004 के बाद के उच्चतम स्तर के करीब है। ऊंची दीर्घकालिक बॉन्ड यील्ड से आम तौर पर सोने और चांदी जैसे निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल का बाजार भी महत्वपूर्ण कारक रहेगा। रूस और यूक्रेन की ओर से ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाए जाने के बावजूद सऊदी अरब और इराक से बढ़ी आपूर्ति ने इस महीने कच्चे तेल की उपलब्धता बेहतर की है और कीमतों पर दबाव डाला है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी रोजगार आंकड़े सोने के लिए अगली बड़ी परीक्षा होंगे। मजबूत रोजगार आंकड़े ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद को मजबूत कर सकते हैं, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। वहीं, कमजोर रोजगार आंकड़ों से ऐसी उम्मीदें कम हो सकती हैं और कमजोर डॉलर के कारण सोने को समर्थन मिल सकता है।
महात्मा गांधी जयंती के कारण शुक्रवार को जिंस बाजार बंद रहेंगे।
भाषा योगेश पाण्डेय
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