नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) विमल इलायची के निर्माताओं ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख कर महाराष्ट्र एफडीए द्वारा जारी एक कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की अपील की। महाराष्ट्र एफडीए ने विमल इलायची के ब्रांड एम्बैसडर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी कर कहा था कि उन्होंने विज्ञापन अभियान में उत्पाद को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश किया।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की एकल पीठ ने इस मामले की सुनवाई के लिए क्षेत्रीय क्षेत्राधिकार के मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
अपनी याचिका में पीबी एग्रो ने कहा कि वह ‘विमल’ ब्रांड के तहत इलायची उत्पाद के प्रचार के लिए प्रतिष्ठित अभिनेताओं की सेवाएं लेती है और उनके साथ उसके विज्ञापन समझौतों के तहत कंपनी यह सुनिश्चित करती है कि विज्ञापन अभियान लागू कानूनों का पूरी तरह से पालन करता है।
याचिका में कहा गया कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) द्वारा इस आरोप के साथ विनियामक नोटिस जारी किए गए थे कि विमल इलायची के विज्ञापन विमल पान मसाला के ‘परोक्ष’ प्रचार के समान हैं, जो महाराष्ट्र में प्रतिबंधित उत्पाद है।
याचिका में कहा गया कि महाराष्ट्र एफडीए ने विमल इलायची के विज्ञापनों में नजर आने वाले अभिनेताओं को यह साबित करने वाले दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था कि विमल इलायची प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों से अलग उत्पाद है। महाराष्ट्र एफडीए ने प्रचार अभियान को रोकने और डिजिटल मंच से संबंधित सामग्री को हटाने की भी मांग की थी।
याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि 11 अगस्त, 2026 का एफडीए नोटिस केवल अभिनेताओं को भेजा गया, कंपनी को नहीं, जबकि राज्य नियामक द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई से कंपनी को अपूरणीय क्षति होने वाली है।
वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता को अपनी बात रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। कंपनी ने दावा किया कि महाराष्ट्र एफडीए के पास विज्ञापन पर रोक लगाने के निर्देश जारी करने का क्षेत्राधिकार नहीं है।
अपनी याचिका में कंपनी ने यह भी कहा कि परोक्ष विज्ञापन के आरोप निराधार हैं क्योंकि 2001 से महाराष्ट्र में विमल पान मसाला का न तो निर्माण किया गया है और न ही इसे बेचा गया है, और तंबाकू युक्त पान मसाला को उच्चतम न्यायालय द्वारा 2013 से देश भर में प्रतिबंधित किया जा चुका है।
केंद्र और केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने तर्क दिया कि यह याचिका बंबई उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की जानी चाहिए थी, क्योंकि कारण बताओ नोटिस महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी किया गया है।
भाषा पाण्डेय अजय
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