गोरखपुर, सात सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में राप्ती नदी के किनारे स्थित गुरु गोरखनाथ घाट पर आकाशीय बिजली गिरने से गुंबदनुमा ढांचा ढहने की घटना में दो अधिवक्ताओं की मौत के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने इस मामले में इंजीनियर और ठेकेदार को हिरासत में लिया है। वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के खिलाफ भी एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया कि मृतक अधिवक्ता संजय सिंह की पत्नी अर्चना सिंह की शिकायत पर राजघाट थाने में ड्रेनेज विभाग के तत्कालीन अवर अभियंता (जेई), सहायक अभियंता (एई) और ढांचे के निर्माण से जुड़े ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले में इंजीनियर और ठेकेदार समेत दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।
गोरखपुर के जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो श्मशान घाट पर क्षतिग्रस्त निर्माण, एंबुलेंस पहुंचने में देरी और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी।
जांच में निर्माण की गुणवत्ता, गुंबद की संरचनात्मक स्थिति और इसके रखरखाव के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, मौसम में अचानक आए बदलाव के बीच रविवार को श्मशान घाट परिसर में आकाशीय बिजली गिरने से यह हादसा हुआ। उस समय दोनों अधिवक्ता अपने एक साथी की मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए घाट पहुंचे थे।
बिजली गिरने के प्रभाव से अंतिम संस्कार में शामिल लोगों के लिए बनाए गए गुंबदनुमा शेड का एक हिस्सा टूटकर गिर गया, जिसके नीचे बैठे दोनों अधिवक्ता मलबे में दब गए।
मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और मलबा हटाकर दोनों घायलों को बाहर निकाला। उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई।
अधिकारियों के अनुसार, राप्ती नगर निवासी अधिवक्ता आलोक अस्थाना (45) की जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई, जबकि शक्ति नगर कॉलोनी निवासी अधिवक्ता संजय सिंह ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ दिया।
अधिवक्ताओं ने घटना के बाद एंबुलेंस पहुंचने में देरी का आरोप लगाया था।
इस बीच, आलोक अस्थाना की पत्नी शालिनी ने चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएमओ और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि आलोक को समय पर उपचार नहीं मिला और सूचना देने के करीब 45 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची।
इन आरोपों के बाद अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर सड़क जाम कर दी। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्होंने आंदोलन समाप्त कर दिया।
दोनों अधिवक्ताओं का अंतिम संस्कार सोमवार को उसी महायोगी गुरु गोरखनाथ घाट पर किया गया, जहां यह हादसा हुआ था। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, परिजन और शुभचिंतक शामिल हुए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए थे। प्रशासन ने दोनों पीड़ित परिवारों को मुआवजे के चेक सौंप दिए हैं।
इससे पहले जिलाधिकारी दीपक मीणा ने रविवार को बताया था कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आकाशीय बिजली गिरने से ढांचे का एक हिस्सा गिरा। उन्होंने स्थल का तकनीकी निरीक्षण कराने और ढांचे की स्थिति की जांच के निर्देश दिए थे।
प्रशासन ने एंबुलेंस सेवा में देरी की शिकायतों की जांच के भी आदेश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि 27.85 करोड़ रुपये की लागत से विकसित गुरु गोरखनाथ घाट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 फरवरी 2021 को किया था।
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत