मुंबई, 23 अप्रैल (भाषा) पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, उच्च ऊर्जा लागत, व्यापार प्रवाह में बाधा और वित्तीय बाजार पर पड़ने वाले प्रभावों से घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। आरबीआई के एक बुलेटिन में बृहस्पतिवार को यह बात कही गई।
रिजर्व बैंक के अप्रैल बुलेटिन में प्रकाशित ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ शीर्षक वाले लेख में कहा गया कि पश्चिम एशिया के संघर्ष ने मार्च में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ा दिया था, हालांकि अप्रैल के पहले पखवाड़े में कुछ राहत देखी गई है।
लेख के अनुसार घरेलू आर्थिक गतिविधियों ने कई क्षेत्रों में मजबूती दिखायी है, जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में सुस्ती देखी गई है। इसमें आगे कहा गया कि संघर्ष की तीव्रता और अवधि, साथ ही ऊर्जा एवं अन्य बुनियादी ढांचे को होने वाला नुकसान, मुद्रास्फीति और वृद्धि के लिए जोखिम पैदा करता है।
लेख में कहा गया, ”यदि संघर्ष जारी रहता है और आपूर्ति श्रृंखलाएं जल्द बहाल नहीं होती हैं, तो यह उच्च ऊर्जा लागत, व्यापार प्रवाह में व्यवधान और वित्तीय बाजार में अस्थिरता के रूप में घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है।”
बुलेटिन में इस बात पर भी ध्यान दिलाया गया कि हालांकि मुद्रास्फीति संतोषजनक स्तर पर बनी हुई है, लेकिन मौसम संबंधी अनिश्चितताओं सहित आपूर्ति-पक्ष के व्यवधानों के कारण इसमें बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ गया है।
भाषा पाण्डेय रमण
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