नयी दिल्ली, आठ जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को सोने की कीमतों में 1,100 रुपये की गिरावट दर्ज की गई जबकि चांदी 5,000 रुपये प्रति किलो टूट गई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और निवेशकों द्वारा कीमती धातुओं की बिकवाली के कारण कीमती धातुओ पर दबाव देखने को मिला।
स्थानीय सर्राफा कारोबारियों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,100 रुपये गिरकर 1,58,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) पर आ गया, जो शुक्रवार को 1,59,900 रुपये प्रति 10 ग्राम था।
चांदी की कीमतों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। यह 5,000 रुपये टूटकर 2,55,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जिससे लगातार चौथे सत्र में गिरावट जारी रही। दो जून को यह 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी। इस तरह चांदी में अब तक लगभग 15,300 रुपये यानी करीब छह प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है।
विश्लेषकों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने कीमती धातुओं की दिशा बदल दी है। पहले जहां पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में समर्थन मिल रहा था, वहीं अब तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने और नीतिगत दरों में कटौती टलने की आशंका के चलते सोने पर दबाव बढ़ गया है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस विश्लेषक सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों के दृष्टिकोण को लेकर अनिश्चितता के बीच वैश्विक बाजार में कमजोरी का असर सोने पर पड़ा है।’’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना करीब एक प्रतिशत गिरकर 4,291.79 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी 1.34 प्रतिशत घटकर 66.93 डॉलर प्रति औंस रही।
मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा कि मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव रहा।
इस बीच, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमतें दिन में करीब पांच प्रतिशत उछलकर 98.07 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। हालांकि, बाद में ईरान की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा के बाद इसमें कुछ नरमी आई।
कोटक सिक्योरिटीज की जिंस शोध प्रमुख कायनात चैनवाला ने कहा, ‘‘10 जून को आने वाले अमेरिकी महंगाई आंकड़े बाजार के लिए अहम होंगे। अगर मुद्रास्फीति अधिक रहती है तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति बनी रह सकती है, जिससे डॉलर मजबूत होगा और कीमती धातुओं पर और दबाव बढ़ सकता है।’’
विश्लेषकों के मुताबिक, कीमती धातुओं में यह गिरावट हाल में देखी जा रही कमजोरी का ही विस्तार है। निवेशक अब सुरक्षित निवेश के बजाय बढ़ती ऊर्जा कीमतों से महंगाई पर पड़ने वाले असर पर कहीं अधिक ध्यान दे रहे हैं।
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