पश्चिम एशिया संकट: सीआईआई ने समन्वित राजकोषीय, वित्तीय और कारोबारी प्रतिक्रिया का आह्वान किया
पश्चिम एशिया संकट: सीआईआई ने समन्वित राजकोषीय, वित्तीय और कारोबारी प्रतिक्रिया का आह्वान किया
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) उद्योग निकाय भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव को कम करने के लिए एक 20 सूत्रीय एजेंडा पेश किया। इसमें प्राथमिक बाजार में विदेशी निवेशकों के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (एलटीसीजी) से अस्थायी छूट, समयबद्ध संघर्ष से जुड़ी आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (सीएल- ईसीएलजीएस) शुरू करने और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए तीन महीने तक ऋण स्थगन जैसे उपायों की मांग की गई है।
सीआईआई ने प्रस्ताव दिया कि प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) मानदंडों पर पुनर्विचार किया जा सकता है, ताकि बैंक बाहरी व्यवधानों के दौरान क्षेत्र-विशिष्ट तनाव के प्रति अधिक लचीले ढंग से प्रतिक्रिया दे सकें।
इसके अलावा, संगठन ने सुझाव दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एमएसएमई और अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक विशेष पुनर्वित्त खिड़की स्थापित कर सकता है।
सीआईआई ने सुझाव दिया कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता के दौरान प्राथमिक बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह बनाए रखने के लिए वित्त मंत्रालय विदेशी निवेशकों को प्राथमिक बाजार निवेश में दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर से अस्थायी छूट देने पर विचार कर सकता है। इसके लिए पात्र होल्डिंग अवधि को दो से बढ़ाकर तीन साल किया जा सकता है। सीआईआई ने कहा कि यह नपातुला प्रोत्साहन स्थिरता का संकेत देगा और धैर्यवान पूंजी को प्रोत्साहित करेगा।
उद्योग निकाय ने सुझाव दिया कि वित्त मंत्रालय महामारी के दौरान लागू की गई योजना की तर्ज पर एक समयबद्ध संघर्ष से जुड़ी आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना (सीएल- ईसीएलजीएस) शुरू करने पर विचार कर सकता है। इससे प्रभावित उद्यमों, विशेष रूप से एमएसएमई, निर्यातकों और गैस पर निर्भर क्षेत्रों को सरकारी गारंटी के माध्यम से कार्यशील पूंजी दी जा सकेगी।
अन्य सुझावों में बिजली शुल्कों में अस्थायी राहत, नकद ऋण सीमा में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि और ऋण प्रसंस्करण शुल्क में छूट शामिल है। सीआईआई ने लंबित माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिफंड और शुल्क वापसी दावों को तेजी से निपटाने का भी आग्रह किया।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘सरकार और आरबीआई ने गति, स्पष्टता और समन्वय के साथ प्रतिक्रिया दी है। शुरुआती उपायों ने धारणा को स्थिर करने में मदद की है।’’ उन्होंने आगे कहा कि नीतिगत प्रतिक्रिया के अगले चरण में लक्षित नकदी सहायता और व्यापार लागत प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत हो सकती है।
भाषा पाण्डेय अजय
अजय

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