नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ‘भुगतान संतुलन का एक वास्तविक दबाव परीक्षण’ है, जिसका मुद्रास्फीति, चालू खाते और विनिमय दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। हालांकि, भारत की मजबूत राजकोषीय नीति, बुनियादी ढांचा निवेश और सुधार संघर्ष के मौजूदा माहौल से निपटने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अपने कच्चे तेल की आवश्यकता कर 87 प्रतिशत आयात के जरिये पूरा करता है। इसमें से 46 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर या उसके निकट से गुजरता है, जहां औसतन टैंकर यातायात में गिरावट आई है। हमारी एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत आयात किया जाता है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक खाड़ी देशों के माध्यम से आता है। बाहर से अपने परिवार को भेजे जाने वाले पैसे का 38 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, पश्चिम एशिया संकट कोई विदेश नीति संबंधी चिंता नहीं है जो कभी-कभार आर्थिक नियोजन को प्रभावित करती हो। यह भुगतान संतुलन का एक वास्तविक दबाव परीक्षण है, जिसका मुद्रास्फीति, चालू खाते और विनिमय दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा, ‘‘विश्वसनीय रूप से चालू खाते का प्रबंधन करना, उसका वित्तपोषण करना और मुद्रा की विनिमय दर में गिरावट को रोकना वृहद आर्थिक मोर्चे पर वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक अनिवार्यताएं हैं।’’
उन्होंने कहा कि भारत की वृहद आर्थिक बुनियाद, राजकोषीय मजबूती का रास्ता, बुनियादी ढांचा निवेश और सुधार एक ऐसा आधार प्रदान करते हैं जिससे देश इस माहौल में प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकता है।
अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले के बाद पिछले दो महीनों से होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद है। इससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं। भारत का आयात बिल बढ़ने की आशंका है क्योंकि वह अपनी घरेलू कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा।
पश्चिम एशिया संकट से भारत का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़ने और भुगतान संतुलन कमजोर होने की आशंका है।
विभिन्न अनुमानों के अनुसार, भारत का चालू खाते का घाटा बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 1.3 प्रतिशत हो सकता है जो वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 0.8 प्रतिशत था।
भुगतान संतुलन किसी निश्चित अवधि में देश में आने वाली और देश से बाहर जाने वाली मुद्रा के बीच का अंतर होता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया मंगलवार को रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया था।
उन्होंने हैदराबाद में तेलंगाना भाजपा की एक रैली को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कार ‘पूलिंग’ करने, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का अधिक उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया।
नागेश्वरन ने कहा कि भारत का राजकोषीय मजबूती का रास्ता, बुनियादी ढांचा निवेश और हाल के वर्षों में किए गए सुधार एक आधार प्रदान करते हैं, लेकिन रणनीतिक संदर्भ में मजबूत वृहद आर्थिक प्रबंधन से कहीं अधिक की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘संरचनात्मक रूप से परिवर्तित विश्व में अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करना आवश्यक है।’’
नागेश्वर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर संघर्ष की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उभरती अर्थव्यवस्थाएं जो इस धारणा पर योजना बना रही हैं कि 2020 से पहले की वैश्विक आर्थिक संरचना स्वयं को पुनः स्थापित कर लेगी, वास्तव में यह एक ‘रणनीतिक गलती’ होगी।
उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक बिखराव, प्रौद्योगिकी विभाजन, भू-राजनीतिक जोखिमों का निरंतर पुनर्मूल्यांकन और औद्योगिक नीति परिवर्तन की असमान लागत वे संरचनात्मक मापदंड हैं जिनके भीतर निकट भविष्य में आर्थिक नीति का निर्माण किया जाएगा।
नागेश्वरन ने कहा, ‘‘भारत, अपने विशाल आकार, लोकतांत्रिक वैधता और व्यापक संबंधों को देखते हुए, भविष्य की दिशा तय करने में सबसे बेहतर स्थिति में है।’’
सीईए ने कहा कि यह भी आवश्यक है कि रणनीतिक स्पष्टता हो ताकि यह समझा जा सके कि व्यापारिक संबंधों, प्रौद्योगिकी साझेदारियों, आपूर्ति श्रृंखला संरचना और गठबंधन निर्माण को पुनर्गठित करने के लिए सीमित समय ही उपलब्ध है, जो अगली अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था को आकार देगा।
भाषा रमण अजय
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