पश्चिम एशिया संकट से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा: जीटीआरआई

पश्चिम एशिया संकट से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा: जीटीआरआई

पश्चिम एशिया संकट से भारत के 11.8 अरब डॉलर के कृषि निर्यात पर खतरा: जीटीआरआई
Modified Date: March 7, 2026 / 06:48 pm IST
Published Date: March 7, 2026 6:48 pm IST

नयी दिल्ली, सात मार्च (भाषा) आर्थिक शोध संस्थान ‘ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव’ (जीटीआईआर) ने शनिवार को कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत के 11.8 अरब डॉलर मूल्य के कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात पर संकट मंडरा रहा है। इस तनाव से समुद्री मार्ग बाधित हो रहे हैं और बीमा व लॉजिस्टिक की लागत बढ़ने से अनिश्चितता पैदा हो गई है।

संस्थान के अनुसार, साल 2025 में भारत ने इस क्षेत्र को 11.8 अरब डॉलर मूल्य के अनाज, फल, सब्जियां, डेयरी उत्पाद और मसालों का निर्यात किया था, जो भारत के कुल कृषि निर्यात का 21.8 प्रतिशत है।

भौगोलिक निकटता और वहां रहने वाले भारतीयों की बड़ी आबादी के कारण खाड़ी देश भारतीय खाद्य उत्पादों के लिए एक स्वाभाविक बाजार रहे हैं।

जीटीआईआर ने कहा, ‘हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष से समुद्री मार्ग बाधित हो रहे हैं, बीमा लागत बढ़ रही है और लॉजिस्टिक में अनिश्चितता पैदा हो रही है।’

आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 7.48 अरब डॉलर के अनाज, फल, सब्जियां और मसाले भेजे, जो भारत के इस श्रेणी के कुल वैश्विक निर्यात का 29.2 प्रतिशत है। इसमें चावल के निर्यात पर सबसे बड़ा असर पड़ने की आशंका है। भारत ने इस क्षेत्र को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया, जो उसके कुल वैश्विक चावल निर्यात का 36.7 प्रतिशत है। इससे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के किसान सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

इसके अलावा, पिछले साल भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों को भारी मात्रा में केले (39.65 करोड़ डॉलर), प्याज-लहसुन, कॉफी, चाय और समुद्री व मांस उत्पादों का निर्यात किया।

डेयरी उत्पादों के मामले में भी भारत के कुल निर्यात का करीब 29 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है।

जीटीआईआर के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले एक दशक में भारतीय कृषि निर्यात की पश्चिम एशियाई बाजारों पर निर्भरता काफी बढ़ गई है। अब जारी संघर्ष, पोत परिवहन मार्गों में व्यवधान और बढ़ती बीमा लागत निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा कर रही है, जिसका सीधा असर देश के कई राज्यों के किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर पड़ सकता है।

भाषा सुमित पाण्डेय

पाण्डेय


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