बट्टेखाते में डाले गए सार्वजनिक बैंकों के कर्ज 2025-26 में कई साल के निचले स्तर पर
बट्टेखाते में डाले गए सार्वजनिक बैंकों के कर्ज 2025-26 में कई साल के निचले स्तर पर
मुंबई, 15 मई (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की तरफ से बट्टेखाते में डाले गए कर्ज की राशि वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गई। कर्ज फंसने के मामलों में कमी और बकाया कर्ज की वसूली में सुधार इसके प्रमुख कारण रहे।
सार्वजनिक बैंकों के वित्तीय नतीजों के पीटीआई-भाषा द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक और इंडियन बैंक सहित अधिकांश बैंकों ने पिछले आठ वर्षों में सबसे कम कर्जों को बट्टेखाते में डाला।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने वित्त वर्ष 2025-26 में 6,330 करोड़ रुपये के कर्ज बट्टेखाते में डाले, जो 2017-18 के बाद सबसे कम है। इसी तरह, बैंक ऑफ इंडिया ने 5,735 करोड़ रुपये बट्टेखाते में डाले जो 2015-16 के बाद न्यूनतम स्तर है। इंडियन बैंक का कर्ज बट्टाखाता 2018-19 के बाद सबसे कम 6,695 करोड़ रुपये रहा।
इसी तरह, इंडियन ओवरसीज बैंक का 1,189 करोड़ रुपये रहा, जो कई वर्षों के निचले स्तर पर है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले वित्त वर्ष में 1,718 करोड़ रुपये के कर्ज बट्टेखाते में डाले, जो 2021-22 के बाद सबसे कम है।
आमतौर पर बैंक उन कर्जों को बट्टेखाते में डालते हैं, जिनकी वसूली की संभावना कम होती है और जिनके लिए 100 प्रतिशत वित्तीय प्रावधान करना पड़ता है।
कर्ज को बट्टेखाते में डालने से बैंकों का बहीखाता साफ-सुथरा होता है और फंसे कर्ज (एनपीए) का स्तर कम दिखता है।
हालांकि, बैंक फंसे कर्ज को बट्टेखाते में डालने के बाद भी वसूली की कोशिश जारी रखते हैं, ताकि बाद में मुनाफे को समर्थन मिले।
रेटिंग एजेंसी इक्रा के वित्तीय क्षेत्र प्रमुख सचिन सचदेवा ने कहा कि सार्वजनिक बैंकों के बट्टेखाते में डाली गयी कर्ज राशि में कमी की मुख्य वजह नए एनपीए में गिरावट, पुराने फंसे कर्जों में कमी और वसूली में सुधार है। बैंकों ने प्रावधान कवरेज अनुपात भी मजबूत किया है, जिससे बट्टेखाते में डालने की जरूरत घटी है।
वित्त मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक पीएसबी का सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.39 प्रतिशत रह गया, जो ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर है। इस दौरान फंसे कर्ज की कुल वसूली 86,971 करोड़ रुपये रही।
बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, कर्ज वृद्धि और आय में बढ़ोतरी के चलते पीएसबी का शुद्ध लाभ 11.1 प्रतिशत बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह लगातार चौथा साल है जब सरकारी बैंकों ने सकल रूप से मुनाफा दर्ज किया।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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