Namaz Ban In Bhojshala: अब भोजशाला में नहीं होगी नमाज, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, ऐतिहासिक साहित्य को लेकर कह दी ये बात
Namaz Ban In Bhojshala: ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है। अदालत ने भोजशाला को मंदिर माना है।
Namaz Ban In Bhojshala/Image Credit: AI
- ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है।
- अदालत ने भोजशाला को मंदिर माना है।
- कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की इजाजत भी दे दी है।
Namaz Ban In Bhojshala: धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला पर हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया है। अदालत ने भोजशाला को मंदिर माना है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की इजाजत भी दे दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब इसे हिंदू पक्ष की बड़ी जीत मानी जा रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हमने पाया है कि, इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है। कोर्ट ने कहा कि, ऐतिहासिक साहित्य यह स्थापित करता है कि विवादित क्षेत्र भोजशाला के रूप में परमार वंश के राजा भोज से संबंधित संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में जाना जाता था। (Namaz Ban In Bhojshala) हाईकोर्ट की तरफ से यह भी कहा गया है कि, भोजशाला परिसर में अब से नमाज नहीं पढ़ी जाएगी, केवल पूजा की जाएगी।
आपको बता दें कि, हाईकोर्ट ने 12 मई को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ आज इस प्रकरण में अंतिम निर्णय सुनाया है।
2022 में हिंदू पक्ष ने दायर की थी याचिका
Namaz Ban In Bhojshala: यह याचिका वर्ष 2022 में हिंदू पक्ष की ओर से हाईकोर्ट में दायर की गई थी। याचिका में भोजशाला परिसर से जुड़े धार्मिक अधिकारों और व्यवस्थाओं को लेकर कई मांगें उठाई गई थीं। करीब चार वर्षों तक चले इस कानूनी विवाद के बाद अब फैसला आ गया है। इस दौरान मामले को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से लगातार कानूनी और सामाजिक गतिविधियां जारी रहीं। (Namaz Ban In Bhojshala) उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद मामले की नियमित सुनवाई 6 अप्रैल से शुरू हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हुई और सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
भोजशाला सुनवाई के प्रमुख बिंदु
- 12 मई 2026, मंगलवार को इंदौर में भोजशाला प्रकरण की सुनवाई उच्च न्यायालय में पूरी हुई।
- वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस द्वारा उच्च न्यायालय इंदौर में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय कर हिंदू समाज के पूर्ण आधिपत्य के लिए याचिका क्रमांक 10497/ 2022 लगाई गई थी।
- इसी प्रकरण में आगे चलकर वर्ष 2024 में भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया गया।
- Namaz Ban In Bhojshala: वर्ष 2026 में 23 जनवरी,शुक्रवार वसंत पंचमी के अवसर पर दिनभर अबाधित पूजा अर्चना हेतु सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश इसी प्रकरण में दिया गया था।
- भोजशाला प्रकरण की सुनवाई 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में निरंतर जारी थी। (Namaz Ban In Bhojshala)
- अप्रैल 2026 से 9 अप्रैल 2026 तक हिंदू पक्ष की ओर से तर्क रखे गए।
- इसके पश्चात मुस्लिम पक्ष एवं अन्य पक्षों द्वारा तर्क रखे गए।
- इस मुख्य याचिका के साथ ही चार अन्य याचिका और एक अपील भी क्लब थी जिनकी भी सुनवाई पूरी हो गई हैं।
हिंदूओं की याचिका की प्रमुख मांगे
- हिंदू समाज को भोजशाला में अनुच्छेद 25 के अनुसार पूजा का अधिकार मिले तथा मुस्लिम समाज को भोजशाला परिसर में किसी भी धार्मिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाए।
- केंद्र सरकार को आदेशित किया जावे कि भोजशाला हेतु एक ट्रस्ट बनाया जावे जिससे कि भोजशाला का संचालन एवं प्रबंध किया जा सके।
- इसी ट्रस्ट को यह आदेशित किया जावे कि माँ सरस्वती की प्रतिमा की पूजा एवं अर्चना निर्बाध रूप से कराई जाए।
- भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज द्वारा की जा रही नमाज बंद हो। (Namaz Ban In Bhojshala)
- भारतीय पुरातत्व संरक्षण विभाग के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त किया जावे एवं हिंदू समाज को नियमित प्रतिदिन पूजा करने का अधिकार मिले।
- Namaz Ban In Bhojshala: ब्रिटिश म्यूजियम में रखी माँ वाग्देवी की प्रतिमा को पुनः वापस लाया जावे एवं भोजशाला धार में स्थापित किया जाए।
‘धार भोजशाला एक मंदिर है’ भोजशाला विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला… #Bhojshala | #KamalMaulaMasjid | #Dhar | #MPNews
— IBC24 News (@IBC24News) May 15, 2026
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