भारत के सौर, आईटी उत्पादों से जुड़े उपायों के खिलाफ समिति गठित करेगा डब्ल्यूटीओ

भारत के सौर, आईटी उत्पादों से जुड़े उपायों के खिलाफ समिति गठित करेगा डब्ल्यूटीओ

भारत के सौर, आईटी उत्पादों से जुड़े उपायों के खिलाफ समिति गठित करेगा डब्ल्यूटीओ
Modified Date: June 23, 2026 / 08:17 pm IST
Published Date: June 23, 2026 8:17 pm IST

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) विश्व व्यापार संगठन का विवाद निपटान निकाय मंगलवार को भारत के खिलाफ सौर सेल, मॉड्यूल और आईटी उत्पादों से जुड़े उपायों को लेकर चीन द्वारा दायर मामले में एक समिति बनाने पर सहमत हो गया। एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

चीन का आरोप है कि भारत के शुल्क और प्रोत्साहन उपाय चीनी सौर ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों के साथ भेदभाव करते हैं और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन करते हैं।

भारत ने इससे पहले मई में इस मामले में डब्ल्यूटीओ के तहत विवाद समिति बनाने के चीन के अनुरोध को रोक दिया था।

हालांकि, जिनेवा स्थित एक अधिकारी ने बताया कि विवाद निपटान निकाय ने चीन के दूसरे अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। यह अनुरोध मंगलवार को निकाय की बैठक के दौरान स्वीकार किया गया।

समिति अब यह तय करेगी कि भारत द्वारा कुछ खास उच्च प्रौद्योगिकी आयातित उत्पादों पर लगाए गए आयात शुल्क और सौर ऊर्जा उत्पादों के लिए कुछ प्रोत्साहन उपाय डब्ल्यूटीओ प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं या नहीं।

यह अनुरोध पिछले साल दिसंबर में चीन की तरफ से दायर विवाद पर आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने के लिए हुई द्विपक्षीय बातचीत के विफल होने के बाद किया गया है।

भारत ने चीन के दूसरे अनुरोध पर खेद व्यक्त करते हुए कहा है कि डब्ल्यूटीओ के सीमित विवाद समाधान संसाधनों को वास्तविक और अनसुलझे व्यापारिक मुद्दों के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

भारत का कहना है कि चीन के साथ बातचीत के दौरान, उसने यह कहा था कि संबंधित उपाय डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत उसकी जिम्मेदारियों के अनुरूप थे।

चीन ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रौद्योगिकी उत्पादों पर भारत का शुल्क या आयात शुल्क और आयातित सामान के बजाय घरेलू उत्पादों के उपयोग जैसे उपाय चीनी सामान के साथ भेदभाव करते हैं।

चीन इन क्षेत्रों में उत्पादों का एक बड़ा निर्यातक है। उसने दावा किया था कि सहायता उपाय और प्रोत्साहन डब्ल्यूटीओ के शुल्क और व्यापार पर सामान्य समझौता 1994 (गाट), सब्सिडी और प्रतिपूरक उपायों पर समझौते, और व्यापार-संबंधित निवेश उपायों पर समझौते से जुड़े नियमों का उल्लंघन करते हैं।

भारत और चीन दोनों ही डब्ल्यूटीओ के सदस्य हैं। अगर किसी सदस्य देश को लगता है कि किसी दूसरे सदस्य देश की नीति या योजना के तहत दी जा रही मदद से उसके कुछ सामान के निर्यात को नुकसान हो रहा है, तो वह 166 सदस्यों वाले इस बहुपक्षीय संगठन के विवाद निपटान व्यवस्था के तहत शिकायत दर्ज करा सकता है।

भाषा रमण अजय

अजय


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