रायपुर, 10 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ में पिछले 26 महीनों में करंट लगने, शिकार और आपसी लड़ाई समेत अलग-अलग वजहों से 38 हाथियों और नौ बाघों की मौत हुई है। राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
कांग्रेस की विधायक शेषराज हरबंश के एक सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि इस दौरान, राज्य में तेंदुआ, भालू, नीलगाय और चीतल समेत 562 दूसरे जंगली जानवर भी अलग-अलग वजहों से मारे गए।
अपने लिखित सवाल में हरबंश ने दिसंबर 2023 और जनवरी 2026 के बीच बाघ और हाथी की मौत की जगह, समय और वजहों समेत विभिन्न जानकारी मांगी थी।
अपने जवाब में कश्यप ने बताया कि इस अवधि में नौ बाघ और 38 हाथी मारे गए, जबकि 562 दूसरे जंगली जानवर भी मारे गए।
कश्यप ने बताया कि नौ बाघों में से दो की मौत शिकारियों द्वारा बिछाए गए उपकरण से करंट लगने तथा दो की मौत आपसी लड़ाई में हुई।
वन मंत्री ने अपने लिखित उत्तर में बताया है कि पिछले साल 10 अक्टूबर को गुजरात के वनतारा में नंदन वन चिड़ियाघर के आठ साल के एक बाघ की मौत कई अंगों के काम बंद कर देने से होने से हुई थी।
जवाब में कहा गया है कि 38 हाथियों में से 14 की मौत करंट लगने से हुई, जबकि 10 की डूबने से हुई।
अन्य 562 जंगली जानवरों में से 145 की मौत नंदन वन चिडियाघर और सफारी में हुई।
जवाब के मुताबिक दिसंबर 2023 में पांच, 2024 में 61, 2025 में 76 और जनवरी 2026 में तीन जानवरों की मौत हुई।
मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि इन मौतों के कारणों में आपसी लड़ाई, दम घुटना, भीषण गर्मी लगना, निमोनिया और संक्रमण शामिल है।
भाषा संजीव
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