Bastar Pandum 2026: आज छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगी राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु, ‘बस्तर पण्डुम-2026‘ का करेंगी शुभारंभ, यहां जानें मिनट टू मिनट कार्यक्रम

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Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ ‘बस्तर पण्डुम-2026‘ का 7 फरवरी 2026 को शुभारंभ करेंगी।

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  • Publish Date - February 7, 2026 / 06:49 AM IST,
    Updated On - February 7, 2026 / 06:56 AM IST

Bastar Pandum 2026/Image Credit: IBC24.in File Photo

HIGHLIGHTS
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ दौरे पर रहेंगी।
  • सुबह 10.30 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
  • सुबह 11.10 से बस्तर पंडुम का शुभारंभ करेगी राष्ट्रपति।

Bastar Pandum 2026: रायपुर: राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मु आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ ‘बस्तर पण्डुम-2026‘ का 7 फरवरी 2026 को शुभारंभ करेंगी। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 9 फरवरी तक आयोजित होगा। जनजातीय समाज के इस तीन दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ जनजातीय जीवनशैली, मान्यताओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत सहेजने और (Bastar Pandum 2026) प्रदर्शित करने का पर्व है। बस्तर पण्डुम लोककला और संस्कृति तथा स्थानीय परंपराओं से जुड़ा उत्सव है। यह उत्सव बस्तर जनजातीय बस्तर पण्डुम जानजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और उनकी समृद्ध परंपरा को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। इस उत्सव के माध्यम से बस्तर अंचल की सांस्कृतिक को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

राष्ट्रपति का मिनट टू मिनट कार्यक्रम

Bastar Pandum 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 10.30 बजे मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पहुंचेंगी और यहां से सीधे लालबाग मैदान रवाना होंगी। राष्ट्रपति मुर्मू लालबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी और बस्तर पंडुम में लगे स्टॉल्स का अवलोकन करेगी। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुबह 11.10 से बस्तर पंडुम का शुभारंभ करेगी। संभाग स्तरीय समारोह का शुभारंभ करें के (Bastar Pandum 2026) बाद राष्ट्रपति मुर्मू जगदलपुर से रायपुर रवाना होंगी और रायपुर से दिल्ली के लिए रवाना होंगी।

आज होगा “बस्तर पंडुम 2026” का शुभारंभ

Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय जनजातीय एवं लोक संस्कृति महोत्सव “बस्तर पंडुम 2026” का शुभारंभ समारोह 7 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे जगदलपुर में होगा। समारोह की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, (Bastar Pandum 2026) उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव और विजय शर्मा, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप विशेष रूप से शामिल होंगे।

उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है “बस्तर पंडुम 2026”

Bastar Pandum 2026: बस्तर अंचल में पण्डुम पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में जनजातीय समाज की जीवनशैली के दर्शन होते है। इस बार पण्डुम पूरी भव्यता के साथ आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 12 विधाओं की प्रस्तुति दी जाएगी। युवा कलाकारों के माध्यम से बस्तर जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा व आभूषण, पूजा पद्धति, (Bastar Pandum 2026) बस्तर शिल्प, जनजातीय चित्रकला का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके अलावा जनजातीय पेय पदार्थ, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य एवं बस्तर वन औषधि पर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

कार्यक्रम में सांसद द्वय भोजराज नाग और महेश कश्यप, विधायक किरण सिंहदेव, लता उसेण्डी, विक्रम उसेण्डी, नीलकण्ठ टेकाम, आशाराम नेताम, चैतराम अटामी, विनायक गोयल, सावित्री मनोज मंडावी, लखेश्वर बघेल, विक्रम मंडावी तथा महापौर संजय पाण्डेय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम नागरिक शामिल होंगे।

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बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ कब और कहां होगा?

बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ 7 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे जगदलपुर के लालबाग मैदान में किया जाएगा।

बस्तर पंडुम 2026 का उद्घाटन कौन करेंगे?

बस्तर पंडुम 2026 का शुभारंभ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ के राज्यपाल करेंगे।

बस्तर पंडुम 2026 कितने दिनों तक आयोजित होगा?

बस्तर पंडुम 2026 संभाग स्तरीय आयोजन के रूप में तीन दिनों तक, यानी 7 फरवरी से 9 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

बस्तर पंडुम 2026 में क्या-क्या प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी?

बस्तर पंडुम 2026 में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा, आभूषण, पूजा पद्धति, बस्तर शिल्प, जनजातीय चित्रकला और पारंपरिक व्यंजनों की प्रस्तुतियां होंगी।

बस्तर पंडुम 2026 का उद्देश्य क्या है?

बस्तर पंडुम 2026 का उद्देश्य बस्तर अंचल की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को संरक्षित करना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।