Police and Naxalite Encounter: फंस गया टॉप नक्सली लीडर पापाराव!.. बस्तर के इस इलाके में सुरक्षाबलों के साथ भीषण मुठभेड़, इतने माओवादी ढेर

Police and Naxalite Encounter: जानकारी के अनुसार, बीजापुर जिला रिजर्व गार्ड (DRG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और कोबरा बटालियन के जवानों द्वारा संयुक्त रूप से यह अभियान चलाया जा रहा है। सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर रखा है और तलाशी अभियान जारी है।

Police and Naxalite Encounter: फंस गया टॉप नक्सली लीडर पापाराव!.. बस्तर के इस इलाके में सुरक्षाबलों के साथ भीषण मुठभेड़, इतने माओवादी ढेर

Police and Naxalite Encounter || Image- IBC24 News File

Modified Date: January 17, 2026 / 10:18 am IST
Published Date: January 17, 2026 10:12 am IST
HIGHLIGHTS
  • बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों की भीषण मुठभेड़
  • टॉप नक्सली लीडर पापाराव की मौजूदगी की खबर
  • डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा का संयुक्त अभियान

बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के एक नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ की खबर है। (Police and Naxalite Encounter) बताया जा रहा है कि यह मुठभेड़ सोमवार सुबह से जारी है, जिसमें दोनों ओर से लगातार गोलीबारी हो रही है।

पापाराव के मौजूदगी की खबर

सूत्रों के मुताबिक, इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों के वरिष्ठ कमांडर पापाराव के मौके पर मौजूद होने की सूचना मिली है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। घटनास्थल से दो नक्सलियों के शव बरामद होने की भी खबर सामने आई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस संबंध में भी कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

तलाशी अभियान जारी

जानकारी के अनुसार, बीजापुर जिला रिजर्व गार्ड (DRG), स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और कोबरा बटालियन के जवानों द्वारा संयुक्त रूप से यह अभियान चलाया जा रहा है। (Police and Naxalite Encounter) सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर रखा है और तलाशी अभियान जारी है।

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नक्सलियों का सरेंडर जारी

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 20 से अधिक नक्सली कल आत्मसमर्पण कर दिया। माओवादियों ने कल शाम 4 बजे पुलिस ऑफिसर्स मेस के कॉन्फ्रेंस हॉल में एसपी और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डाले।

सूत्रों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अलग-अलग संगठनों से जुड़े रहे हैं और लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे। इन पर कई गंभीर वारदातों में शामिल होने का आरोप भी रहा है। हालांकि, अब ये नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर चुके हैं।

माओवादी संगठन की टूटी कमर

बीते कुछ वर्षों में बीजापुर और आसपास के इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने नक्सल विरोधी अभियानों को तेज किया है। लगातार सर्च ऑपरेशन, कैंपों की स्थापना और इलाके में सुरक्षा की मजबूत मौजूदगी के चलते नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।

अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की ओर से तय नियमों के तहत पुनर्वास पैकेज, आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

नक्सली संगठनों के मनोबल के लिए बड़ा झटका है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की रणनीति प्रभावी साबित हो रही है और विकास की राह पर भरोसा बढ़ रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि नक्सली और सुरक्षाबलों की डेडलाइन से भी डर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और पूरे परिसर की निगरानी की जा रही है।

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