Bilaspur High Court News: ‘नहीं रहेगी बहन की रस्में अधूरी’, कैदी भाई मिली शादी में जाने की अनु​मति, लेकिन कोर्ट ने रखी ये शर्त, जानें

Bilaspur High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डकैती के मामले में 10 साल की सजा काट रहे कैदी को बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी है।

Bilaspur High Court News: ‘नहीं रहेगी बहन की रस्में अधूरी’, कैदी भाई मिली शादी में जाने की अनु​मति, लेकिन कोर्ट ने रखी ये शर्त, जानें

Chhattisgarh High Court/Photo Credit: IBC24 File

Modified Date: June 30, 2026 / 02:05 pm IST
Published Date: June 30, 2026 2:03 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने 10 साल की सजा काट रहे कैदी को बहन की विदाई में शामिल होने की अनुमति दी
  • अंतरिम जमानत नहीं मिली, लेकिन पुलिस अभिरक्षा में विवाह स्थल ले जाने का आदेश दिया गया
  • कोर्ट ने मानवीय और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया

बिलासपुर। Bilaspur High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में चौकाने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने डकैती व साजिश जैसे मामले में 10 साल की सश्रम कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को बहन की शादी की विदाई में शामिल होने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने के बजाय, पुलिस पहरे में रस्में निभाने की अनुमति दी है। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की सिंगल बेंच ने मानवीय व सामाजिक मूल्यों को ध्यान रखते यह निर्णय दिया है।

Bilaspur High Court News दरअसल, भिलाई के सुपेला कृष्णानगर निवासी मनीष बंसोर को दुर्ग की विशेष अदालत ने 18 नवंबर 2025 को दोषी करार दिया था। मनीष को आईपीसी की धारा 120-बी के तहत 7 साल और धारा 397 के तहत 10 साल कारावास की सजा सुनाई गई है, और वह जेल में सजा काट रहा है। मनीष ने कोर्ट में अंतरिम जमानत आवेदन दायर किया। जिसमें बताया गया, कि मनीष की सगी बहन की शादी है। परिवार में मनीष के अलावा और कोई दूसरा भाई नहीं है, जो भाई की मुख्य सामाजिक और पारंपरिक रस्मों को पूरा कर सके। इसलिए उसे कुछ दिनों की अंतरिम जमानत दी जाए। (Chhattisgarh High Court)

पुलिस अभिरक्षा में जाने की अनुमति

Bilaspur High Court News सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अंतरिम जमानत का विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि आरोपी धारा 397 जैसे बेहद गंभीर और हिंसक अपराध का सजायाफ्ता कैदी है, इसलिए उसे खुला नहीं छोड़ा जा सकता। हालांकि, उन्होंने मानवीय पक्ष को देखते हुए सुझाव दिया कि यदि अदालत उचित समझे, तो आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में विदाई समारोह में शामिल होने भेजा जा सकता है। कोर्ट ने मनीष की अंतरिम जमानत तो मंजूर नहीं की, लेकिन उसे पुलिस अभिरक्षा में जाने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने संबंधित केंद्रीय जेल के अधीक्षक और दुर्ग पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के साथ मनीष बंसोर को आज पुलिस अभिरक्षा में भिलाई स्थित विवाह स्थल लेकर जाने के निर्देश दिए, ताकि वह अपनी बहन की विदाई की रस्में पूरी कर सके। रस्म खत्म होते ही पुलिस उसे तत्काल वापस जेल दाखिल कराएगी।

 

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सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.