Chhattisgarh High Court News: पति से अलग रह रही थी पत्नी… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसला, अब नहीं मिलेगा ये अधिकार, जानें पूरा मामला

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Chhattisgarh High Court News: पति से अलग रह रही थी पत्नी… छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसला, अब नहीं मिलेगा ये अधिकार, जानें पूरा मामला

Chhattisgarh High Court News/Image Source: IBC24 File

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
  • ‘सिर्फ रिश्ता नहीं, आचरण भी जरूरी’
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

बिलासपुर:  Chhattisgarh High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पत्नी बिना किसी वैध और पर्याप्त कारण के पति और ससुराल से अलग रह रही है, तो वह मासिक भरण-पोषण की हकदार नहीं होगी। कोर्ट ने पाया कि पति ने विवाह बचाने के लिए पत्नी को साथ रखने की कोशिश की और इसके लिए याचिका तक दायर की, लेकिन पत्नी साथ रहने को तैयार नहीं हुई।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (Chhattisgarh High Court Judgment)

Chhattisgarh High Court News: सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने भरण-पोषण न देने के परिवार न्यायालय के आदेश को बरकरार रखते हुए पत्नी की याचिका खारिज कर दी। यह फैसला बिलासपुर निवासी प्रवीण कुमार वेदुला के मामले में दिया गया। पत्नी ने परिवार न्यायालय द्वारा भरण-पोषण से इंकार किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि परिवार न्यायालय के आदेश में कोई ऐसी अवैधता या त्रुटि नहीं है, जिसके कारण हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़े। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवादों में केवल संबंध ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों का आचरण भी न्याय का आधार होता है।

बिना वजह अलग रह रही पत्नी को नहीं मिलेगा भरण-पोषण (Maintenance Denied Wife)

Chhattisgarh High Court News: प्रवीण का विवाह 10 फरवरी 2019 को बिलासपुर में हुआ था। विवाह के कुछ दिनों बाद पत्नी ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के आरोप लगाए। 19 अक्टूबर 2020 को महिला थाना बिलासपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें कार और 10 लाख रुपये की मांग तथा मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। हालांकि, पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर मामला न्यायालय पहुंचा, जहां 19 मार्च 2021 को याचिका खारिज कर दी गई। बाद में पुनरीक्षण याचिका भी सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी।

दहेज प्रताड़ना के आरोप और कानूनी प्रक्रिया (husband wife case )

Chhattisgarh High Court News: हाईकोर्ट ने कहा कि जब पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के तहत वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की थी, तब पत्नी के पास वैवाहिक जीवन पुनः शुरू करने का अवसर था। चूंकि पति ने अपना वैवाहिक जीवन बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, यहां तक कि दांपत्य पुनर्स्थापना के लिए याचिका तक दायर की, लेकिन पत्नी ने साथ रहना स्वीकार नहीं किया। ऐसी स्थिति में भरण-पोषण का दावा स्वीकार्य नहीं है।

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"छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भरण-पोषण फैसला" क्या है?

हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि पत्नी बिना उचित कारण पति से अलग रह रही है, तो उसे मासिक भरण-पोषण नहीं मिलेगा।

"धारा 9 हिंदू विवाह अधिनियम" का इस मामले में क्या महत्व है?

धारा 9 के तहत पति ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए याचिका दायर की थी, जिससे यह साबित हुआ कि वह विवाह जारी रखना चाहता था।

"दहेज प्रताड़ना केस बिलासपुर" में अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने पाया कि पत्नी वैवाहिक जीवन पुनः शुरू करने को तैयार नहीं थी, इसलिए भरण-पोषण का दावा उचित नहीं है।