‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित, धर्मांतरण कराने वालों पर लगेगी रोक: साय

‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित, धर्मांतरण कराने वालों पर लगेगी रोक: साय

‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित, धर्मांतरण कराने वालों पर लगेगी रोक: साय
Modified Date: March 19, 2026 / 10:00 pm IST
Published Date: March 19, 2026 10:00 pm IST

रायपुर, 19 मार्च (भाषा) छत्तीसगढ़ विधानसभा में बृहस्पतिवार को ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के पारित होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि इससे उन लोगों पर रोक लगेगी, जो लोगों की अशिक्षा, गरीबी और अज्ञानता का लाभ उठाकर और प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराते थे।

छत्तीसगढ़ विधानसभा ने आज ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026′ पारित कर दिया। विधेयक का उद्देश्य जबरन, लालच, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर किए जाने वाले धर्म परिवर्तनों को रोकना है।

विधेयक के पारित होने के बाद साय ने विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘नवरात्र के अवसर पर मातारानी का आशीर्वाद छत्तीसगढ़ पर हमेश बना रहे। छत्तीसगढ़ में खुशहाली हो। आज के इस ऐतिहासिक दिन में विधानसभा में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के पास होने से उन लोगों पर रोक लगेगी, जो लोगों की अशिक्षा, गरीबी और अज्ञानता का लाभ उठाकर लोभ-प्रलोभ देकर धर्मांतरण कराते थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक के तहत धर्मांतरण कराने वाले तथा धर्मांतरित होने वाले, दोनों पक्षों को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर नोटिस जारी किया जाएगा और इसकी जानकारी जिले की वेबसाइट पर भी सार्वजनिक की जाएगी।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राधिकृत अधिकारी एक माह के भीतर पूरे मामले की जांच कर यह सुनिश्चित करेंगे कि कहीं इसमें लोभ, प्रलोभन, भय या किसी प्रकार का दबाव तो शामिल नहीं है। जांच पूर्ण होने के बाद, सब कुछ नियमानुसार पाए जाने पर ही इसकी अनुमति प्रदान की जाएगी। इस प्रकार बिना अनुमति या किसी भी प्रकार के लोभ, प्रलोभन, भय, अशिक्षा या अज्ञानता के आधार पर धर्मांतरण करना अब संभव नहीं होगा।

साय ने इसके अलावा सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि उनकी सरकार धर्म रक्षा के संकल्प को साकार कर रही है।

साय ने कहा है, ‘‘धर्म रक्षा के संकल्प को साकार कर रही सुशासन सरकार। ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के माध्यम से प्रदेश के गरीब, शोषित और वंचित वर्गों की आस्था और अधिकारों को सशक्त संरक्षण मिलेगा। साथ ही लालच, भय, दबाव या छल-कपट से धर्म परिवर्तन कराने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित होगी।’’

वहीं अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा है, ‘‘अवैध धर्मांतरण पर अब लगेगी पूर्ण लगाम! प्रदेशवासियों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सशक्त ढाल बनेगा ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’।

धर्म की रक्षा, समाज की सुरक्षा – यही हमारा संकल्प है। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण जैसे संवेदनशील विषय पर सख्त और स्पष्ट व्यवस्था लागू करते हुए हमने यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी प्रकार के छल, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से धर्म परिवर्तन न हो सके। विवाह के माध्यम से धर्मांतरण की आड़ में हो रहे दुरुपयोग पर अब पूर्ण विराम लगेगा। पारदर्शिता, कानून का सम्मान और समाज की गरिमा, इन तीनों की रक्षा हमारा दायित्व है।

‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के तहत अवैध धर्मांतरण के विरुद्ध सख्त प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश में छल, बल, प्रलोभन या डिजिटल माध्यम से धर्म परिवर्तन कराना अब संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध होगा।

साय ने कहा है, ‘‘सुशासन का संकल्प, धर्म की गरिमा का संरक्षण करने वाला छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026, अवैध धर्मांतरण पर सख्त प्रहार करेगा, कमजोर वर्गों की धर्मरक्षा का मजबूत आधार बनेगा। सुशासन के संकल्प से धर्म और संस्कृति का हो रहा सम्मान, अवैध धर्मांतरण पर लगेगी लगाम!’’

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज सदन में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पेश किया। इस विधेयक पर लगभग पांच घंटे की चर्चा के बाद इसे पारित कर दिया गया।

इस विधेयक में जबरन धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ सख्त दंड के प्रावधान किए गए है। विधेयक में ‘सामूहिक धर्मांतरण’ के मामलों में आजीवन कारावास और नाबालिगों, महिलाओं, मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के पीड़ित होने वाले मामलों में 20 साल तक की कारावास की सजा शामिल है।

कांग्रेस सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया और बहस में हिस्सा नहीं लिया।

सदन में जब उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विधेयक पेश करने की अनुमति मांगी तब कांग्रेस सदस्यों ने उसे परामर्श के लिए प्रवर समिति को भेजने की मांग की। जब पीठासीन सभापति ने उनकी मांग को खारिज कर दिया तब कांग्रेस सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।

मुख्यमंत्री साय ने पहले ही घोषणा की थी कि उनकी सरकार राज्य में जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए कड़ा कानून लाएगी।

भाषा संजीव सुरभि

सुरभि


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