Chhattisgarh High Court: लिफ्ट लेकर जा रहे थे, हादसे में हुई मौत… क्या मिलेगा बीमा मुआवजा? हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Chhattisgarh High Court: हाईकोर्ट ने कहा है कि मालवाहक वाहन में सफर या लिफ्ट लेकर यात्रा के दौरान दुर्घटना में मौत होने पर भी मुआवजा मिलेगा।

Chhattisgarh High Court: लिफ्ट लेकर जा रहे थे, हादसे में हुई मौत… क्या मिलेगा बीमा मुआवजा? हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

CG High Court News/Photo Credit: IBC24

Modified Date: June 13, 2026 / 08:36 am IST
Published Date: June 13, 2026 8:35 am IST
HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला बरकरार रखा
  • मालवाहक वाहन में सफर कर रहे व्यक्ति की मौत पर भी बीमा कंपनी को मुआवजा देना होगा
  • बीमा कंपनी बाद में यह राशि वाहन मालिक और चालक से वसूल सकती है

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाएं नहीं थम रहे हैं, प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हर दिन सड़क हादसे में कई लोग अपनी जान गंवा रहें हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है, कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले को बरकरार रखते हुए कहा है, यदि कोई व्यक्ति मालवाहक वाहन में यात्रा कर रहा है और दुर्घटना में उसकी मौत हो जाती है, तो भी बीमा कंपनी को मुआवजे का भुगतान करना होगा। इसके बाद बीमा कंपनी इस राशि की वसूली वाहन के मालिक और चालक से कर सकती है।

बीमा कंपनी ने मुआवजा देने से किया इनकार

उक्त आदेश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की सिंगल बेंच ने द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। प्रकरण के अनुसार छत्तीसगढ़ जांजगीर-चांपा जिले के निवासी घनश्याम पटेल की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। वाहन मालिक और चालक रमेश यादव ने अदालत में स्वीकार किया था कि वह वाहन को लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। हादसे के समय मृतक घनश्याम पटेल अपनी पत्नी के साथ मालवाहक वाहक वाहन की ट्रॉली में बैठा था। बीमा कंपनी से मुआवजा देने से मना किया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, जांजगीर-चांपा ने 15 जनवरी 2020 को मृतक के परिजन को बीमा कंपनी को मुआवजा देने और बाद में उसे मालिक से वसूलने का आदेश दिया था। मोटर दावा अधिकरण के फैसले को चुनौती देते हुए बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

बीमा कंपनी की याचिका खारिज

बीमा कंपनी के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष पैरवी करते हुए कहा कि मृतक एक मालवाहक वाहन में मुफ्त की सवारी के तौर पर यात्रा कर रहा था, जो बीमा पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन है, इसलिए बीमा कंपनी पर मुआवजा देने की जिम्मेदारी नहीं हैं। हाईकोर्ट ने मृतक के परिजन को मुआवजे का हकदार पाया। सिंगल बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा, भले ही यात्री बीमा पॉलिसी के तहत कवर न हो, फिर भी भुगतान और वसूली का सिद्धांत लागू होगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया, मृतक के आश्रितों की संख्या 6 है, जिसमें उसकी पत्नी, मां और चार बच्चे शामिल हैं। कोर्ट ने अधिकरण द्वारा तय किए गए मुआवजे में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए बीमा कंपनी के साथ ही वाहन मालिक की याचिका को भी खारिज कर दिया।

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