Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,Chhattisgarh High Court Suspension Rule /Image: IBC24 File
बिलासपुर। Chhattisgarh High Court Suspension Rule: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय सेवक निलंबित फैसला सनाया है। हाई कोर्ट का कहना है कि यदि किसी शासकीय सेवक को निलंबित करने के 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र नहीं सौंपा जाता है या उसके निलंबन की अवधि को कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाता, तो ऐसा निलंबन कानूनन स्वतः ही समाप्त माना जाएगा।
जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने लोक निर्माण विभाग के एक निलंबित अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। प्रकरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ उत्तर बस्तर कांकेर के आरईएस. कॉलोनी निवासी एमके खरे को लोक निर्माण विभाग में पदस्थापना के दौरान राज्य शासन ने 9 जनवरी 2026 को निलंबित कर दिया था। तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग ने न उन्हें चार्जशीट दी गई और न ही निलंबन बढ़ाने का कोई आदेश जारी किया।
खरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निलंबन समाप्त करने की मांग की। याचिका में तर्क दिया कि सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9( 5) (ए) के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी को निलंबित करने के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट जारी करना अनिवार्य है। यदि विभाग ऐसा करने में विफल रहता है, तो कर्मचारी स्वतः ही सेवा में बहाली का हकदार हो जाता है। इस मामले में विभाग ने नियमों का खुला उल्लंघन किया है। कोर्ट ने तर्कों से सहमति जताते हुए याचिका स्वीकार ली।
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