Chhattisgarh High Court Suspension Rule: छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को HC से बड़ी राहत, इतने दिन में चार्जशीट नहीं तो निलंबन अपने आप खत्म, जानें पूरा मामला

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Chhattisgarh High Court Suspension Rule: छत्तीसगढ शासकीय कर्मचारी को निलंबित किए जाने के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट जारी करना अनिवार्य है।

Chhattisgarh High Court Suspension Rule /Image: IBC24 File

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निलंबन संबंधी महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
  • 90 दिनों के भीतर चार्जशीट नहीं मिलने पर निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा
  • लोक निर्माण विभाग के अधिकारी एमके खरे की याचिका स्वीकार करते हुए निलंबन आदेश रद्द किया गया

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court Suspension Rule: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय सेवक निलंबित फैसला सनाया है। हाई कोर्ट का कहना है कि यदि किसी शासकीय सेवक को निलंबित करने के 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र नहीं सौंपा जाता है या उसके निलंबन की अवधि को कानूनी रूप से आगे नहीं बढ़ाया जाता, तो ऐसा निलंबन कानूनन स्वतः ही समाप्त माना जाएगा।

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने लोक निर्माण विभाग के एक निलंबित अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। प्रकरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ उत्तर बस्तर कांकेर के आरईएस. कॉलोनी निवासी एमके खरे को लोक निर्माण विभाग में पदस्थापना के दौरान राज्य शासन ने 9 जनवरी 2026 को निलंबित कर दिया था। तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी विभाग ने न उन्हें चार्जशीट दी गई और न ही निलंबन बढ़ाने का कोई आदेश जारी किया।

90 दिनों के भीतर चार्जशीट जारी करना अनिवार्य

खरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निलंबन समाप्त करने की मांग की। याचिका में तर्क दिया कि सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9( 5) (ए) के अनुसार, किसी भी सरकारी कर्मचारी को निलंबित करने के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट जारी करना अनिवार्य है। यदि विभाग ऐसा करने में विफल रहता है, तो कर्मचारी स्वतः ही सेवा में बहाली का हकदार हो जाता है। इस मामले में विभाग ने नियमों का खुला उल्लंघन किया है। कोर्ट ने तर्कों से सहमति जताते हुए याचिका स्वीकार ली।

 

 

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हाईकोर्ट ने निलंबन को लेकर क्या फैसला दिया है?

कोर्ट ने कहा है कि 90 दिनों के भीतर चार्जशीट नहीं देने या निलंबन अवधि नहीं बढ़ाने पर निलंबन स्वतः समाप्त हो जाएगा।

यह मामला किस कर्मचारी से जुड़ा था?

यह मामला लोक निर्माण विभाग के अधिकारी एमके खरे से संबंधित था।

किस नियम के आधार पर फैसला दिया गया?

छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 9(5)(ए) के आधार पर फैसला सुनाया गया।

क्या सभी सरकारी कर्मचारियों को इस फैसले का लाभ मिल सकता है?

ऐसे मामलों में जहां विभाग ने निर्धारित समय सीमा में चार्जशीट जारी नहीं की है, वहां यह फैसला संदर्भ के रूप में महत्वपूर्ण हो सकता है।

हाईकोर्ट ने विभाग के आदेश पर क्या कार्रवाई की?

कोर्ट ने निलंबन आदेश को निरस्त करते हुए याचिका स्वीकार कर ली।