छत्तीसगढ़ : धान खरीदी केंद्र को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का हंगामा

छत्तीसगढ़ : धान खरीदी केंद्र को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का हंगामा

छत्तीसगढ़ : धान खरीदी केंद्र को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का हंगामा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:44 pm IST
Published Date: November 22, 2022 2:30 pm IST

गरियाबंद, 22 नवंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में धान खरीदी केंद्र को स्थानांतरित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने पुलिस दल पर पथराव किया, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

सोशल मीडिया पर प्रसारित घटना के वीडियो में प्रदर्शनकारियों को लाठी-डंडों से सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को जिले के कांडेकेला गांव के ग्रामीणों ने भेजीपदर गांव में संचालित धान खरीदी केंद्र को कांडेकेला में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 130सी पर धुरवागुडी गांव के करीब चक्का जाम कर दिया था।

अधिकारियों के मुताबिक, चक्का जाम कर रहे ग्रामीणों को लगातार समझाया गया, लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद जब जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जिला प्रशासन के अधिकारी ग्रामीणों से बात करने पहुंचे, तब वे अपनी मांग को तत्काल पूरा करने की जिद करने लगे।

अधिकारियों के अनुसार, बाद में ग्रामीणों ने पुलिस दल पर पथराव शुरू कर दिया और सड़क पर फंसी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ करने लगे।

घटना के वीडियो में प्रदर्शनकारी ग्रामीण एक पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाते और उसे पलटते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पथराव में तीन पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं और उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलने के बाद अतिरिक्त बल को मौके पर भेजकर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

इससे पहले, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर कहा था कि उन्हें भेजीपदर धान उपार्जन केंद्र में धान बेचने में कोई समस्या नहीं है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सरकारी अधिकारियों की शिकायत के आधार पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

भाषा

सं संजीव संजीव पारुल

पारुल


लेखक के बारे में