पटरी से उतरी योजना.. जिम्मेदार कौन? PM Awas आवंटन रद्द.. केंद्रांश पर जुबानी जंग!

Derailed plan.. who is responsible? PM Awas allocation cancelled.

Edited By: , November 27, 2021 / 12:21 PM IST

PM Awas allocation cancelled : रायपुरः प्रदेश में जब-जब राज्य सरकार केंद्र से अपने हक की बात कहती है। एक नया विवाद और एक नई बहस छिड़ जाती है। इस बार जबकि केंद्र सरकार ने साल 2021-22 के लिए छत्तीसगढ़ को आवंटित प्रधानमंत्री आवास को रद्द करने की घोषणा की है तो कांग्रेस और बीजेपी नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। विपक्ष कहता है ये राज्य सरकार की उदासीनता है तो सत्ता पक्ष का दावा है कि केंद्र लगातार प्रदेश के हितों की अनदेखी कर पक्षपात पूर्ण रवैया अपना रहा है। सबसे बड़ा सवाल ये कि प्रदेश के ग्रामीण अंचल में इस योजना के तहत अपने आवास का सपना देख रहे लाखों लोगों का हक उन्हें कैसे और कब मिलेगा?

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छत्तीसगढ़ में केंद्र की पीएम आवास योजना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में जुबानी जंग तेज हो चली है। बीजेपी जहां पीएम आवास योजना के रद्द होने के लिए कांग्रेस सरकार को कसूरवार ठहरा रही है तो वहीं कांग्रेस इसके लिए केंद्र को जिम्मेदार बता रही है।

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दरअसल पिछले दिनों केंद्र ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखकर ये जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ में पीएम आवास योजना का परफॉर्मेंस संतोषजक नहीं है। इसीलिए 2021-22 के लिए राज्य को आवंटित 7 लाख 81 हजार 999 आवास का आवंटन निरस्त किया जा रहा है। पत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया कि बार-बार दिशा निर्देश के बावजूद योजना की प्रगति में राज्य सरकार ने रुचि नहीं दिखाई है। जिसपर अब राज्य सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जवाब दिया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र पर तंज कसते हुए कहा कि इंदिरा आवास का नाम बदलकर प्रधानमंत्री आवास कर दिया गया और जब पीएम के नाम से योजना है तो केंद्रांश की राशि 60 फीसदी क्यों है..केंद्रांश 90 या 100 फीसदी क्यों नहीं है। सीएम ने ये भी कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ को कोयला, जीएसटी समेत अन्य चीजों की 20 हजार करोड़ की राशि भी नहीं दे रही है।

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इधर, इस मुद्दे पर बीजेपी इसे सीधे तौर पर राज्य सरकार की लापरवाही बता रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी ने 2022 तक सभी बेघरों को घर देने का संकल्प लिया है। लेकिन अफसोस छत्तीसगढ़ में ये लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा। वैसे केंद्र और राज्य के बीच अपने हकों को लेकर पत्राचार और टकराव नया नहीं है। लेकिन इस बार केंद्र की तरफ से राज्य में प्रधानमंत्री आवासों के आवंटन निरस्त करने के चलते प्रदेश की 80 फीसदी से ज्यादा आबादी जो कि गांवों में निवासरत है। उन्हें एक झटका जरूर लग सकता है।