Mahadev Satta App Case: महादेव सट्टा ऐप मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, विकास गर्ग की इतने संपत्ति की अटैच, आंकड़ा जानकर हैरान हो जाएंगे आप

Mahadev Satta App Case: महादेव सट्टा एप से जुड़े मामले में ED ने विकास गर्ग और उससे जुड़ी संस्थाओं की 940.77 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है।

Mahadev Satta App Case: महादेव सट्टा ऐप मामले में ED की  बड़ी कार्रवाई, विकास गर्ग की इतने संपत्ति की अटैच, आंकड़ा जानकर हैरान हो जाएंगे आप

Mahadev Satta App Case/Image Credit: AI


Reported By: Suman Pandey,
Modified Date: July 10, 2026 / 06:17 pm IST
Published Date: July 10, 2026 6:01 pm IST
HIGHLIGHTS
  • महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है।
  • ED ने विकास गर्ग और उससे जुड़ी संस्थाओं की 940.77 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है।
  • ED ने PMLA के तहत घर, जमीन, शेयर और अन्य संपत्तियां कुर्क की है।

Mahadev Satta App Case: रायपुर: महादेव सट्टा एप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने कार्रवाई की है तेज कर दी है। ED ने विकास गर्ग और उससे जुड़ी संस्थाओं की 940.77 करोड़ की संपत्ति अटैच कर ली है। ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत रायपुर जोनल कार्यालय द्वारा की गई है। कुर्क की गई संपत्तियां विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों तथा उनके स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों और संस्थाओं से संबंधित हैं। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से हर महीने 450 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई का दावा किया है। इतना ही नहीं ED ने इस मामले में अब तक 3,800 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है।

ED ने दी कार्रवाई की जानकारी

ED के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों में आलीशान आवासीय भवन, विभिन्न स्थानों पर स्थित भूखंड, व्यावसायिक भूमि, इक्विटी शेयर, अन्य प्रतिभूतियां (सिक्योरिटीज), निवेश और वित्तीय परिसंपत्तियां शामिल हैं। (Mahadev Satta App Case) एजेंसी का कहना है कि ये सभी संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक और स्काईएक्सचेंज के जरिए संचालित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से अर्जित अपराध की आय से खरीदी गई थीं या उसी धन के माध्यम से तैयार की गई वित्तीय संरचना का हिस्सा थीं।

दुर्ग पुलिस की एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच

Mahadev Satta App Case: ED  ने बताया कि इस मामले की जांच की शुरुआत छत्तीसगढ़ पुलिस के दुर्ग जिले में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई थी। बाद में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों के अलावा आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल तथा अन्य राज्यों में दर्ज विभिन्न एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया। इन मामलों में ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के संचालकों, प्रमोटरों और सहयोगियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप लगाए गए हैं।

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